देखिए ये रहीं स्वर्ग जाने वाली सीढ़ियां, यहीं वाल्मीकि ने लिखी थी रामायण

 Valmiki Ashram Temple (Kanpur, India): Address, Religious Site》जीवन दर्शन Desk: भगवान राम और श्रीकृष्ण को धरती पर आए भले ही लाखों साल बीत गए हों, लेकिन धरती पर सतयुग की सीढ़ियां आज भी मौजूद हैं। ये सीढ़ियां सीधे स्वर्ग तक ले जाती हैं। यूपी में कानपुर से 28 किलोमीटर दूर एक छोटी सी जगह ‘बिठूर’ है। यहीं पर वाल्‍मीकि का आश्रम है, जहां बैठकर उन्होंने रामायण की रचना की थी। इसी आश्रम में सीता ने लव-कुश नाम के दो बेटों को जन्म दिया था।

Valmiki Ashram Temple in bithoor
ये आश्रम काफी ऊंचाई पर बना हुआ है। इसलिए यहां तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां बनाई गई हैं। इन सीढ़ियों को स्‍वर्ग जाने की सीढ़ी कहा जाता है। स्‍थानीय लोग इसे ‘सरग नशेनी’ भी कहते हैं। बताया जाता है कि इस आश्रम की आखिरी सीढ़ी से पूरे बिठूर का सुंदर नजारा देखा जा सकता है।

सीता की रसोई के पास बनी हैं स्वर्ग की सीढ़ियां
यहां के पंडित नंदकिशोर दीक्षित बताते हैं कि जब भगवान राम के आदेश पर लक्ष्मण ने सीता को जंगल में छोड़ दिया था तो वो भटकती हुईं यहां पहुंची थीं। यहीं पर उनकी मुलाकात वाल्‍मीकि से हुई थी। इसके बाद वो उन्‍हें बिठूर के आश्रम में लेकर गए। उनका आश्रम आज भी यहां पर बना हुआ है। इस आश्रम का मुख्य द्वार Lav and Kush (from Ramayana) birth place temple in Bithoorकाफी ऊंचाई पर स्‍थित है। इसके पास ही सीता की रसोई भी है, जिसके पास स्वर्ग की सीढ़ियां बनी हुई हैं।

नाना पेशवा ने बनवाई थी सीढ़ियां
पंडित नंदकिशोर दीक्षित बताते हैं कि इसमें 65 सीढ़ियां और सात फेरे बने हुए हैं। पहले यहां दीपक जलाकर रखा जाता था, जिन्‍हें ‘दीप मालिका’ भी कहा जाता है। नंद किशोर दीक्षित की मानें तो इन सीढ़ियों को नाना पेशवा ने बनवाया था। इसके बगल में एक घंटा भी लगा है। कहा जाता है कि जब इस घंटे को बजाया जाता था तो तात्या टोपे को पता चल जाता था कि उन्हें बुलाया जा रहा है।

यहीं पर रहकर वाल्‍मीकि ने की थी रामायण की रचना
वाल्मीकि आश्रम में तीन मंदिर हैं। इनमें से एक मंदिर खुद वाल्मीकि का है, जिसमें उनकी प्रतिमा है। वे पद्मासन की मुद्रा में बैठे हुए हैं और दाएं हाथ में लेखनी लिए हुए हैं। यहीं पर रहकर उन्‍होंने रामायण की रचना की थी। उनके पास ही भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित है, जहां भगवान विष्णु शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण किए हुए मुद्रा में हैं। दिए गए फोटोज़ छुएं और अंदर स्लाइड्स में पढें कैसे हुआ लव-कुश का जन्म, ब्रह्माजी ने क्यों इस आश्रम में स्थापित किया शिवलिंग और आज कैसा है सीताकुंड...

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चाय के बागानों और वाइल्ड लाइफ सैंक्चुअरी से सजा है दोआर का इलाका

Assam tourism》WORLD TOURISM Desk: यदि आप खूबसूरत नजारों का मजा लेना चाहते हैं तो पूर्वोत्तर भारत एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। यहां की नेचुरल ब्यूटी को हर मौसम में निहारा जा सकता है। इस बार चलते हैं हिमालय की तलहटी में बसे दोआर क्षेत्र में।

Vijayrampatrika.com बता रहा है यहां की खासियत के बारे में। आपको यह टूर अवश्य पसंद आएगा, जब नेचुरल लव मन में होने लगेगा….!

दोआर/Assam tourism
दोआर या दुआर पूर्वोत्तर भारतीय इलाका है, जो हिमालय की तलहटी में बसा है। संकोस नदी इसके 8,800 वर्गमील एरिया को वेस्ट और ईस्ट दोआर में बांटती है। भूटान के आसपास पूर्वोत्तर भारत में बाढ़ के मैदान ईस्ट हिमालय की तलहटी कहलाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस इलाके में अनेक दर्रे हैं जो हिमालय को जाते हैं। दोआर का मतलब नेपाली, असमिया, मैथिली, भोजपुरी, मगही, और बंगाली भाषाओं में दरवाजा होता है। इसे भारत से भूटान के लिए एंट्री डोर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

पुराने जमाने में भूटान के लोग मैदानी इलाकों में रहने वाले लोगों के साथ 18 मार्गों के माध्यम से संपर्क कर सकते थे। पश्चिमी असम स्थित पूर्वी दोआर में समतल मैदान है, जो अनेक नदियों द्वारा बंटा हुआ है और वहां की जनसंख्या बहुत कम है। पश्चिमी दोआर पश्चिम बंगाल के नॉर्थ में स्थित है और यह मैदानी इलाके व हिमालय से जुड़े तराई क्षेत्र का एक हिस्सा है।

दोआर में घूमने वाली जगहें और खरीददारी करने वाली चीजों के बारे में जानने के लिए छुएं फोटोज, अंदर स्लाइड्स में पढें …

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राधा जन्माष्टमी कल: मां के गर्भ से नहीं जन्मीं राधा, ऐसे करें पूजा

राधा जन्माष्टमी आज: ये है पूजन विधि》जीवन दर्शन Desk: प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि (इस बार 29 अगस्त, मंगलवार) को राधा जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन व्रज में श्रीकृष्ण के प्रेयसी राधा का जन्म हुआ था। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार राधा भी श्रीकृष्ण की तरह ही अनादि और अजन्मी हैं, उनका जन्म माता के गर्भ से नहीं हुआ। इस पुराण में राधा के संबंध में बहुत ही ऐसी बातें बताई गई हैं जो बहुत कम लोग जानते हैं।

ये बातें इस प्रकार हैं –
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार श्रीकृष्ण के बाएं अंग से एक सुंदर कन्या प्रकट हुई, प्रकट होते ही उसने भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में फूल अर्पित किए। श्रीकृष्ण से बात करते-करते वह उनके साथ सिंहासन पर बैठ गई। यह सुंदर कन्या ही राधा हैं।

– एक बार गोलोक में श्रीकृष्ण विरजादेवी के समीप थे। श्रीराधा को यह ठीक नहीं लगा। श्रीराधा सखियों सहित वहां जाने लगीं, तब श्रीदामा नामक गोप ने उन्हें रोका। इस पर श्रीराधा ने उस गोप को असुर योनि में जन्म लेने का श्राप दे दिया। तब उस गोप ने भी श्रीराधा को यह श्राप दिया कि आपको भी मानव योनि में जन्म लेना पड़ेगा। वहां गोकुल में श्रीहरि के ही अंश महायोगी रायाण नामक एक वैश्य होंगे। …अब यहां से आगे पढ़ने के लिए क्लिक करें दी गर्इ स्लाइड्स पर

Vijayrampatrika.com पर आप जान सकते हैं श्रीराधे से जुड़ी हर बात, कैसे उन्होंने श्रीकृष्ण संग रास रचाया, किस स्थान पर वह अवतरित हुर्इं और आज उन गावों की स्थिति कैसी है, बरसाने के प्रमुख मंदिर कौन-कौन से हैं आदि-आदि। अपनी पसंद देखने के लिए इन लिंक्स को क्लिक करें –

इस गांव की थीं राधा, कृष्ण संग एक पेड़ में दिख रही परछार्इ
ये हैं ब्रज में प्रमुख मंदिर, जानिए इनमें दर्शन को कब खुलते हैं पट
यहां आज भी मिलते हैं निशान राधा-कृष्ण के रास के, नन्दगांव में था चरागाह
यहां राधा ने कृष्ण को स्पर्श से किया था मना अपने कंगन से बना दिया था कुंड
ये हैं राधाष्टमी पर बरसाना में सुरक्षा इंतजाम, कोसों तक लग जाएंगी भक्तों की कतार

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दुनिया के इन 10 महलों के दिलकश हैं नजारे लेकिन, सबसे डरावने ये ही

World`s Most Dangerous Cities - Top 10 | Vijayrampatrika.com》दुनियां 360° news Desk: दादी – नानी से भुतही कहानियां आपने भी सुनी होंगी। कभी सोचा भी होगा कि ये सब रीयल होता है या सिर्फ रील तक ही। आस-पडौस में किसी पीडित को देखा होगा होगा, जिस पर ओझा (सयाना/तांत्रिक) ने ऊपरी चक्कर का साया बताया हो। फिर झाड़-फूंक की होगी, बच्चों को अमुक व्यक्ति से दूर रहने को कहा होगा।

डर, रहस्य और बेचैनी की यह वजहें क्या महज इत्तेफाक हैं? नहीं ताे फिर लोग कुछ स्थानों पर जाने से डरते क्यों हैं? क्यों कुछ प्लेस भुतही माने गए हैं, क्या वहां वाकर्इ में खतरनाक परिस्थितियों से गुजरना पड़ सकता है? इन कुछ सवालों के जवाब तलाशने के लिए यहां बतार्इ गयी दुनिया की 10 मिस्ट्री से भरपूर जगहों पर जाने की जरूरत हो सकती है…

 Vijayrampatrika.com आज़ आपको ले चल रहा है भारत के बाहर, कुछ ऐसे महलों तक जहां सालों से सन्नाटा छाया हुआ है। अक्सर प्रेम जाहिर करने के लिए किसी एकांत जगह जाने को आतुर प्रेमी (कपल) भी वहां नहीं पहुंचते। तो कहीं चमगादड़, पतोरी और जहरीले जीवों की चिल्लाहट ही सुनार्इ देती हैं। एडवेंचर के शौकीन कुछ ही लोग इधर रुख करते हैं, मगर तमाम शंकाओं के बीच:

1. एडिनबर्ग कैसल, स्कॉटलैण्ड
Edinburgh Castle, Scotland
यूनार्इटेड किंगडम (ब्रिटेन) में एक मध्ययुगीन महल के बारे में कर्इ कहानियां प्रचिलित हैं। यह महल देखने में जितना खूबसूरत है, उससे कहीं अधिक नेग्लेक्टेड भी। पहाडी़ पर स्थित एडिनबर्ग कैसल के आसपास बेहद हरियाली और पेडों के झुरमुठ हैं। इसका आर्किटेक्चर भी आकर्षक है। लेकिन इसे ‘मैडेन कैसल’ (Maidens Castle) क्यों कहते हैं, इसके पीछे राज बताए गए हैं।
कहा जाता है कि अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम के दौरान मारे गए लोगों के घोस्ट यहां रहते हैं। जिनकी प्लेग महामारी से तड़प-तडप कर जानें गर्इ थीं, उनकी रूह की आवाजें सुनी गर्इ हैं। कुत्तों जैसी अजीब चीखें सुनने का दावा कर्इ एंकर कर चुके हैं। यहां के फोटो ड्रोन से लिए जाते हैं, जबकि महल के अंदर कोर्इ जाता नहीं है। 16वीं सदी में इसका निर्माण हुआ था।

दिए गए फोटोज़ छुएं और अंदर स्लाइड्स में जानें दुनिया की ऐसी ही अन्य मोस्ट सेक्रेट, नेग्लेक्टेड एंड हॉरर साइट्स के बारे में……….

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भारत के सबसे बडे़ इस किले में हैं फूल और शीश महल, कर देते हैं मंत्रमुग्ध

the old blue city of Jodhpur shot from the Mehrangarh》WORLD TOURISM Desk: इंडिया पुराने किलों और स्मारकों के लिए फेमस है। यहां के किले हमारे गौरवशाली इतिहास की गाथओं के बारे में बताते हैं। यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज में चित्तौड़गढ़ फोर्ट सहित राजस्थान के पांच किले शामिल हैं। इनमें मेहरानगढ़ फोर्ट अपनी ऊंचार्इ और खूबसूरत कारीगरी का शानदार अट्रैक्शन है। इसके आज भी खूब बने रहने और उस दौर में राजा की रानियों के मरने की कहानी बडी़ निराली है।

Vijayrampatrika.com आपको आज़ ले चल रहा है इस किले के भ्रमण पर…

पांच सौ साल से अधिक पुराना मेहरानगढ़
MEHRANGARH FORT – JODHPUR, PHOTOS, HISTORY
राजस्थान के जोधपुर शहर में 120 मीटर से भी ऊंची पहाडी़ पर स्थित है मेहरानगढ़ किला। यह 500 साल से भी ज़्यादा पुराना और सबसे बड़ा किला है। इसे राव जोधा द्वारा बनवाया गया था। इस किले में सात गेट हैं। प्रत्येक गेट राजा के किसी युद्ध में जीतने पर स्मारक के रूप में बनवाया गया था। इस किले में जायापॉल गेट राजा मानसिंह ने बनवाया था। किले के अंदर मोती महल, शीश महल जैसे भवनों को बहुत ही ख़ूबसूरती से सजाया गया है। चामुंडा देवी का मंदिर और म्यूज़ियम इस किले के अंदर ही हैं। इस किले का म्यूज़ियम राजस्थान का सबसे अच्छा म्यूज़ियम माना जाता है।
वैसे भी, राजस्थान को रॉयल पैलेस कई कारणों से कहा जाता है। यह टूरिस्ट्स को सबसे ज़्यादा आकर्षित करने वाला राज्य है। राजस्थान अपने किलों के अलावा थार रेगिस्तान, खूबसूरत झीलें, नेशनल पार्क और एक रॉयल लाइफ स्टाइल के लिए भी फेसम है। राजस्थान के सभी किलों के बारे में जानने के लिए यहां क्लिक करें

फोटोज़ छुएं और अंदर स्लाइड्स में पढें: क्यों बनाया गया ऐसा किला, पाक से हुआ युद्घ?
कैसे हैं मोती महल, फूल महल, शीश महल, सिलेह खाना, दौलत खाना और रंगमहल
पहाडों पर 36KM दीवार से घिरा है ये किला, INDIA के 10 खूबसूरत FORTS
इस किले से रुष्ठ थे मुगल बादशाह, हिंदु रानियां से करते थे हरम का शौक पूरा !

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