इस नदी से प्राप्त होने वाले पत्थरों की होती है पूजा, भगवान विष्णु ने दिया था वरदान

riversदेवोत्थान ||  हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी पर तुलसी का विवाह भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम से कराने की परंपरा है। ऐसी मान्यता है कि इनकी पूजा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। शालिग्राम एक विशेष प्रकार के पत्थर को कहते हैं, यह काले रंग का और चिकना पत्थर होता है। विष्णु के वरदान के कारण शालिग्राम के पत्थर नेपाल में बहने वाली गंडकी नदी से ही प्राप्त होते हैं। यह नदी तुलसी का ही एक रूप है। यानी गंडकी नदी और तुलसी एक ही हैं। यहां जानिए शास्त्रों में बताई गई विष्णु, तुलसी और गंडकी नदी से जुड़ी कथा…

गंडकी नदी और तुलसी, एक ही रूप कैसे हैं
शास्त्रों में एक कथा बताई गई है। इस कथा के अनुसार प्राचीन समय में तुलसी पतिव्रता और धार्मिक आचरण वाली स्त्री थी। इसका विवाह शंखचूड़ नाम के दैत्य से हुआ था। शंखचूड़ बहुत ही पराक्रमी और शक्तिशाली असुर था, इस कारण उसने सभी देवताओं को युद्ध में पराजित कर दिया था। सभी देवता भी उसे मार पाने में असमर्थ थे, क्योंकि शंखचूड़ के लिए तुलसी का सतीत्व रक्षा कवच बना हुआ था।

शंखचूड़ से त्रस्त होकर सभी देवता भगवान विष्णु के पास मदद मांगने पहुंच गए। तब विष्णु ने बताया कि स्वयं उन्होंने ही शंखचूड़ के पिता दंभ को ऐसे पराक्रमी पुत्र का वरदान दिया था। इस कारण वे शंखचूड़ का वध नहीं कर सकते हैं। विष्णु ने सभी देवताओं को शिवजी से प्रार्थना करने के लिए कहा।

इसके बाद सभी देवता शिवजी के पास पहुंच गए और शंखचूड़ की आतंक को खत्म करने के लिए प्रार्थना की। शिवजी देवताओं और सृष्टि के कल्याण के लिए तैयार हो गए। शिवजी शंखचूड़ को मारने के लिए उससे युद्ध करने लगे, लेकिन महादेव भी तुलसी के सतीत्व रूपी रक्षा कवच के कारण असुरराज को खत्म नहीं कर पा रहे थे। दी गर्इ तस्वीरें छुकर अंदर स्लाइड़स में जानिए इसके बाद क्या हुआ…

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