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DIWALI TIPS : इस सीजन कैसे हो ई-शॉपिंग जानें यहां, यूं रहेंगे सुरक्षित और बचेंगे आपके पैसे

diwali 2015 BRAJBHOOMI । दिवाली यानी खरीदारी का सीजन और पैसे का खर्च। हालांकि, ई-कॉमर्स के बढ़ते चलन से त्योहारी खरीदारी काफी आसान होने के साथ-साथ किफायती भी हुई है। लेकिन, ऑनलाइन खरीदारी में थोड़ी सी चूक या असावधानी आपको मुसीबत में डाल सकती है और सेविंग की बजाय चपत भी लग सकती है। यहां vijayrampatrika.com आपको बताने जा रहा है दिवाली पर सुरक्षित ऑनलाइन खरीदारी के साथ पैसे बचाने के कुछ अहम टिप्स –

1. पहली बार ‘कैश ऑन डिलीवरी’ बेहतर
नए ऑनलाइन खरीदार आरामदायक एवं बेहतर अनुभव के लिए कैश ऑन डिलीवरी का विकल्प चुन सकते हैं। यह एक ऐसा विकल्प है जिसमें आप अपने हाथ में सामान आने के बाद भुगतान करते हैं। यदि आप पहली बार ऑनलाइन शॉपिंग कर रहे हैं तो कैश ऑन डिलीवरी (सीओडी) बेहतर विकल्प होगा। यदि आप ऑनलाइन खरीदारी पहले कर चुके हैं, तो क्रेडिट कार्ड के जरिए भुगतान बेहतर है, क्योंकि कार्ड से खरीदारी पर हमेशा अच्छे सौदे की संभावना रहती है। इसके अलावा आप प्वाइंट भी जुटा कर सकते हैं और बाद में इन्हें अन्य सामान की खरीदारी में भुना सकते हैं। ऑनलाइन शॉपिंग और दिवाली ऑफरों का अधिक से अधिक फायदा लेने के लिए देखें गैलरी के पिक्स, स्लाइडस में जानें क्या, कैसे और क्यों करें आप ….. …. ..

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SElF HELP: जब मिले ताकत तो ध्यान रखना चाहिए इन बातों का भी

Tips For Happiness & Power According To Mahabharat》जीवन दर्शन Desk: हमें ताकत के नशे में ” सभ्यता और विनम्रता” को छोड़ना नहीं चाहिए। जो लोग ताकत के घमंड में इन दोनों चीजों को त्याग देते हैं, वे जीवन में कई परेशानियों का सामना करते हैं। यहां जानिए महाभारत का एक प्रसंग जो बताता है कि ताकत के साथ घमंड हो तो व्यक्ति को परेशानियों का सामना करना पड़ता है…

ऐसे टूटा भीम का घमंड
BHIMA AND HANUMAN (Story from Mahabharata
पांडवों को जुए में हारने के बाद बारह साल का वनवास भोगना था। सभी पांचों भाई और द्रौपदी घने जंगलों में भटक रहे थे। वे कैलाश पर्वत के जंगलों में पहुंच गए। उस समय यक्षों के राजा कुबेर का निवास भी कैलाश पर्वत पर ही था।
कुबेर के नगर में एक सरोवर था, जिसमें बहुत सुगंधीत कमल के फूल थे। द्रौपदी को उन फूलों की महक आई तो उसने भीम से कहा कि उसे कमल के ये फूल चाहिए। भीम द्रौपदी के लिए फूल लाने चल दिए। रास्ते में एक घना जंगल था।
भीम ने देखा एक बंदर रास्ते पर पूंछ डाले सो रहा है। किसी जीव को लांघकर गुजर जाना मर्यादा के विरुद्ध था। इसलिए, भीम ने बंदर से कहा अपनी पूंछ हटा लो। मुझे यहां से गुजरना है। बंदर ने नहीं सुना, भीम को क्रोध आ गया। उसने कहा तुम जानते हो मैं महाबली भीम हूं। बंदर ने कहा- इतने शक्तिशाली हो तो तुम खुद ही मेरी पूंछ रास्ते से हटा दो और गुजर जाओ।

भीम ने बहुत कोशिश की, लेकिन पूंछ टस से मस नहीं हुई। तब भीम हार मानकर बैठ गया और वानर से प्रार्थना करने लगा। तब वानर ने अपना असली रूप दिखाया। वे स्वयं पवनपुत्र हनुमानजी थे। उन्होंने भीम को समझाया कि तुम्हें कभी भी अपनी शक्ति पर इस तरह घंमड नहीं करना चाहिए।
अपनी शक्ति के नशे में अंधे हो जाना आम बात है। ऐसे लोग बिरले ही होते हैं जो जितने शक्तिशाली होते हैं, उतने ही विनम्र भी। शक्ति और विनम्रता ऐसे गुण हैं जो विपरीत स्वभाव के होते हैं, लेकिन अगर ये एक ही स्थान पर आ जाएं तो व्यक्ति महान हो जाता है।

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महाभारत काल से है ये खार्इ, भीम ने लिया भा द्रोपदी के अपमान का बदला

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