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हो जाएगा रंग में भंग, अगर होली खेलते वक्त भूले ये बातें!

Happy Holजीवन दर्शन. Desk❥ होली का सूत्र वाक्य लोकप्रिय है – बुरा न मानो होली है। इस नारे की सार्थकता तभी है, जब हम दूसरों की भावनाओं का सम्मान कर एवं मर्यादाओं का ध्यान रखकर होली की परंपराओं को निभाएं। अन्यथा इस पर्व और संबंधों की मिठास, खटास में बदलने में देर नहीं लगती। अत: कुछ ऐसी बातें जिनको अपनाकर इस त्यौहार पर रंग में भंग जैसी स्थिति बनने से बचा जा सकता है …

– होली की परंपरा नृत्य, गायन, वादन प्रधान है। किंतु अति उत्साह में इन गतिविधियों से किसी के साथ अशालीनता, अभद्रता और अपशब्दों के प्रयोग से सामाजिक, पारिवारिक संबंधों की मर्यादा का हनन न होने दें।
– बच्चों, बुजूर्गों और महिलाओं के साथ होली खेलते समय उनके प्रति सम्मान और स्नेह के भाव रखें।
– शराब, भांग या अन्य किसी प्रकार के नशे का सेवन कर होली न खेलें। क्योंकि यह त्यौहार है होश में आने का, न कि होश गंवाने का।
– रासायनिक पदार्थों से बने रंगों जैसे पेंट, वार्निश या अन्य रंगों के उपयोग से बचें। यह त्वचा और आंखों को बुरी तरह से प्रभावित करते हैं। इनके स्थान पर अबीर, गुलाल, टेसु के फूलों का रंग के रुप में उपयोग करें।
– कीचड़, मलबा या अन्य मलीन पदार्थों का उपयोग न करें।
– गुब्बारों के प्रयोग से बचें। इनसे चेहरें या शरीर के अन्य कमजोर अंगों को हानि पहुंच सकती है।
निचोड़ यही है कि होली ऐसे खेलें की रंग बिरंगी गुलाल दिलों में समाए कटु यादों के मलाल का अंत कर दे।

देखें लिंक क्लिक करके … होली महाकवरेज.

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होली के अवसर पर क्या करें?

holi festival 2015जीवन दर्शन. Desk❥ प्राचीन परंपराओं के अनुसार। यह मान्यताएं। सबसे पहली बात यह है कि जिस समय होली जलाई जाए तो उसमे जरुर सम्मिलित हों, यदि किसी कारण आप रात में होलीं जलाने के वक्त शामिल न हो पायें तो अगले दिन सुबह सूरज निकलने से पहले जलती हुई होली के निकट जाकर तीन परिक्रमा करें। होली में अनाज की बालियाँ आदि जरुर डालें। परिवार के सभी सदस्यों के पैर के अंगूठे से लेकर हाथ को सिर से ऊपर पूरा ऊँचा करके कच्चा सूत नाप कर होली में डालना भी जीवन में शुभता लाता है।

होली की विभूति यानि भस्म घर लायें पुरुष को इस भस्म को मस्तक पर और महिला अपने गले में लगाना चाहिए, इससे एश्वर्य बढ़ता है। दूसरे दिन होली खेलने की शुरुआत सुबह सुबह सबसे पहले भगवान को रंग चढ़ा कर ही करनी चाहिए। रंग जरुर खेले इस दिन रंग खेलने से मनहूसियत दूर भाग जाती है और जीवन में खुशियों के रंग आते है। यदि आप घर से बाहर जा कर होली नहीं खेलना चाहते हैं तो कोई बात नहीं घर के भीतर ही होली खेल सकते हैं, लेकिन खेलिए जरूर, इससे जीवन की नीरसता दूर होती है।

होली के दिन मन में किसी के प्रति शत्रुता का भाव न रखें, इससे साल भर आप शत्रुओं पर विजयी होते रहेंगे। घर आने वाले मेहमानों को सौंफ और मिश्री जरुर खिलायें, इससे प्रेम भाव बढ़ता है। तो आशा है आप भी इस प्रकार के परम्परागत तरीकों को अपना कर अपनी होली को शुभ बनाएंगे। जीवन दर्शन एवं हमारौ ब्रज की ओर से आपकी होली के लिए इस बार खास पेशकश…. बस एक-एक क्लिक पर…

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जब हो होलिका दहन, तो बोलें ये लक्ष्मी मंत्र… दूर होगी पैसों की किल्लत

holi worshipजीवन दर्शन. Desk❥ हिन्दू पंचांग की फाल्गुन माह की पूर्णिमा पर होलिका दहन के बाद धुरेड़ी का त्यौहार यही संदेश देता है कि मन, वाणी और शरीर की दरिद्रता को छोड़कर पवित्रता को अपनाया जाए। चूंकि फाल्गुन माह का हिन्दू वर्ष का अंतिम माह भी होता है। इसलिए होली की पवित्र अग्रि में प्रतीकात्मक रूप से हर दोष, बुराई और बुरी बातों का होम आने वाले समय को सुखी, शांत और खुशहाल बनाने की कामना के साथ करना चाहिए।

शास्त्रों में होलिका दहन की शुभ और पुण्य घड़ी में श्रीसूक्त का पाठ घर-परिवार और जीवन से रोग, कलह और मलीनता को दूर कर खुशहाली व समृद्धि लाता है। जानते हैं यह श्रीसूक्त पाठ –

हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम् । चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो ममावह ।1।
तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् । यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम् ।2।
अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रमोदिनीम् श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम् ।3।
कांसोस्मि तां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम् । पद्मेस्थितां पद्मवर्णां तामिहोपह्वये श्रियम् ।4।
चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलंतीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम् । तां पद्मिनीमीं शरणमहं प्रपद्येऽलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे ।5।
आदित्यवर्णे तपसोऽधिजातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽथ बिल्वः । तस्य फलानि तपसानुदन्तुमायान्तरायाश्च बाह्या अलक्ष्मीः ।6।
उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह । प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेस्मिन्कीर्तिमृद्धिं ददातु मे ।7।
क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम् । अभूतिमसमृद्धिं च सर्वां निर्णुदमे गृहात् ।8।
गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम् । ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपह्वये श्रियम् ।9।
मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि। पशूनां रूपमन्नस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः ।10।
कर्दमेन प्रजाभूतामयि सम्भवकर्दम। श्रियं वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम् ।11।
आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीतवसमे गृहे। निचदेवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले ।12।
आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम्। सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह ।13।
आर्द्रां यःकरिणीं यष्टिं पिङ्गलां पद्ममालिनीम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह ।14।
तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्। यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावोदास्योश्वान्विन्देयं पुरुषानहम् ।15।
यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम्। सूक्तं पञ्चदशर्चं च श्रीकामः सततं जपेत् ।16।
पद्मानने पद्म ऊरू पद्माक्षी पद्मसम्भवे। तन्मेभजसि पद्माक्षी येन सौख्यं लभाम्यहम् ।17।
अश्वदायी गोदायी धनदायी महाधने। धनं मे जुषतां देवि सर्वकामांश्च देहि मे ।18।
पद्मानने पद्मविपद्मपत्रे पद्मप्रिये पद्मदलायताक्षि। विश्वप्रिये विश्वमनोनुकूले त्वत्पादपद्मं मयि संनिधत्स्व ।19।
पुत्रपौत्रं धनं धान्यं हस्त्यश्वादिगवेरथम्। प्रजानां भवसि माता आयुष्मन्तं करोतु मे ।20।
धनमग्निर्धनं वायुर्धनं सूर्यो धनं वसुः। धनमिन्द्रो बृहस्पतिर्वरुणं धनमस्तु ते ।21।
वैनतेय सोमं पिब सोमं पिबतु वृत्रहा। सोमं धनस्य सोमिनो मह्यं ददातु सोमिनः ।23।
न क्रोधो न च मात्सर्यं न लोभो नाशुभा मतिः। भवन्ति कृतपुण्यानां भक्तानां श्रीसूक्तं जपेत् ।24।
सरसिजनिलये सरोजहस्ते धवलतरांशुकगन्धमाल्यशोभे। भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवनभूतिकरि प्रसीद मह्यम् ।25।
विष्णुपत्नीं क्षमादेवीं माधवीं माधवप्रियाम्। लक्ष्मीं प्रियसखीं देवीं नमाम्यच्युतवल्लभाम् ।26।
महालक्ष्मी च विद्महे विष्णुपत्नी च धीमहि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् ।27।
श्रीवर्चस्वमायुष्यमारोग्यमाविधाच्छोभमानं महीयते। धान्यं धनं पशुं बहुपुत्रलाभं शतसंवत्सरं दीर्घमायुः ।28।

यहां लिंक पर क्लिक करके देखें होली पर किए जाने वाले कुछ और आसान उपाय.. होली महाकवरेज.

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देखें बस्तर की होली, यहां रस्म में देवी-देवता भी होते हैं शामिल !

bastar's 'rang bhag' holi is uniqueहोली का त्यौहार यूं तो पूरे देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है, पर छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर में पारंपरिक होली का अंदाज कुछ जुदा ही है। यहां ‘रंग-भंग’ नामक रस्म देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। ऐसा कहा जाता है कि मां दंतेश्वरी देवी-देवताओं के साथ होलिका दहन स्थल की आग में होली खेलती हैं।

फाल्गुन लगते ही शुरू हो जाती हैं मंडर्इ की रस्में
होलिका दहन के दूसरे दिन पादुका पूजन व ‘रंग-भंग’ की निराली रस्म में सैकडों लोग हिस्सा लेते हैं। इस मौके पर फाल्गुन मास में मंडई के अंतिम रस्म के रूप में विभिन्न ग्रामों से मेले में पहुंचे लोगों द्वारा आमंत्रित देवी-देवताओं को विधिवत विदाई दी जाती है। बस्तर का जनसमुदाय इस पारंपरिक आयोजन का जमकर लुत्फ उठाता है।

मां सीता की 700 साल पुरानी प्रतिमा का पूजन
मां दंतेश्वरी मंदिर सहायक पुजारी हरेंद्र नाथ जिया कहते हैं कि यहां सती सीता की सात सौ बरस पुरानी प्रतिमा है, जिसे राजा पुरुषोत्तम देव ने यहां स्थापित किया था। तब से यहां फागुन मंडई के दौरान होलिका दहन और देवी-देवताओं के होली खेलने की परम्परा चली आ रही है। यह प्रतिमा एक ही शिला में बनी तथा इसे शनिमंदिर में विराजमान किया गया। एक अन्य रस्म आंवरामार के बाद सती सीता स्थल पर होली का दहन किया जाता है। जबकि गंवरमार रस्म में गंवर (वनभैंसा) का पुतला जलाते हैं। इसमें ताड़ के पत्ते और बांस के ढांचा प्रयुक्त होता है।

गुलाल की जगह होता है हास-परिहास
जहां देश भर में होली के अवसर पर रंग-गुलाल की फुहारें देखी जाती हैं, वहीं बस्तर के आदिवासिय इलाकों में होली के दिनों सामूहिक रूप से हास-परिहास करने की प्रथा विद्यमान है। यह परंपरा बस्तर के काकतीय राजाओं द्वारा माड़पाल स्थान पर होलिका दहन के दौरान शुरू की गर्इ थी। माढ़पाल में होलिका दहन की रात छोटे रथ पर सवार होकर राजपरिवार के सदस्य होलिका दहन की परिक्रमा भी करते हैं, जिसे देखने के लिए काफी संख्या में वनवासी एकत्रित होते हैं। यह अनूठी परंंपरा आज भी यहां कायम है।

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खेलें ईको फ्रेंडली होली, दूसरों पर भी डालें नेचुरल COLORS

Holi spcl_लाइफ स्टाइल. Desk ❥ यदि आपने हर बार हानिकारक रंगों का प्रयोग होली में किया है तो इस बार ईको फ्रेंडली होली मनाइए। ईको फ्रेंडली होली खेलकर आप पानी की बर्बादी को रोकते हैं। साथ ही खतरनाक और एलर्जी पैदा करने वाले केमिकलयुक्‍त रंगों से खुद को भी बचाते हैं…

नैचुरल रंग
इस होली में आप अपने घर पर ही प्राकृतिक रंग बनाइए। नैचुरल जड़ी-बूटियों से बना रंग सुगंधित तो है ही साथ ही यह आपको हानिकारक रंगों से बचाता भी है। आप आसानी से फूलों और जड़ी बूटियों के प्रयोग से पीली, नीला, हरा, लाल रंग अपने घर में बना सकते हैं।

❥ बच्‍चों का ध्‍यान
बच्‍चों की त्‍वचा बहुत नाजुक होती है, ऐसे में बच्‍चों को होली के हानिकारक रंगों से बचाना जरूरी है। बच्‍चों को ऐसा रंग न दें जो हानिकारक हो, बच्‍चों को ईको फ्रेंडली होली के बारे में समझाइए, इन रंगों के खतरनाक दुष्‍प्रभाव के बारे में बच्‍चों को बताइए जिससे कि वे इससे दूर रहें और ज्‍यादा हुड़दंग न करें।

❥ हल्‍के रंग का प्रयोग
जरूरी नहीं कि आप होली ऐसे रंगों से खेलें जिसका रंग कई दिनों तक न छूटे। तो इस बार गुलाल एवं हल्के रंग से होली खेलें। यह आपके लिए और आपकी त्‍वचा दोनों के लिए अच्‍छा है।

❥ बालों को बचायें
होली के हानिकारक रंग अगर बालों में चले गये तो आसानी से नहीं छूटते हैं, इसलिए होली में बालों को रंगों से बचाना बहुत जरूरी है। इसलिए यदि आप रंगों से नहीं बच स‍कते तो होली खेलने से पहले बालों में बादाम या जैतून का तेल लगा लें। इससे बाद में बालों को धोने से रंग छूट जाते हैं।

❥ मुंह पर रंग न मलें
होली खेल रहे हैं तो त्‍वचा का खयाल भी रखें। शरीर के अन्‍य जगह की त्‍वचा की तुलना में चेहरे की त्‍वचा नाजुक होती है, इसलिए मुंह पर यदि कोई रंग मलता हो तो उसे मना कर दें।

❥ इन जगहों पर न जायें
होली पर ऐसी जगहों पर जाने से बचें जिसके बारे में आपको न पता हो कि वहां किस तरह का रंग प्रयोग हो रहा है। ऐसी जगहों पर लोग सूखे रंग आपकी त्‍वचा पर मल सकते हैं जो कि हानिकारक हो सकता है।

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