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अंतिम सांस तक मुगलों से लडी़ ये वीरांगना, पर नहीं मानी अकबर से हार

अकबर से भी इस रानी ने नहीं मानी थी हार, पेट में कटारी मार दे दी अपनी जान Great Hindu Warrior Queen

मुगल सम्राट अकबर मध्यभारत में अपने पैर जमाना चाहता था। उसने रानी दुर्गावती के पास इसका प्रस्ताव भेजा, साथ ही उसने ये भी चेतावनी भी रानी के पास भिजवाई कि अगर ऐसा नहीं किया तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। रानी दुर्गावती ने उसकी एक बात नहीं मानी और युद्ध किया। जब रानी को लगा कि अब वह युद्ध नहीं जीत सकतीं और घायल हो गईं तो अपनी कटार को छाती में घुसा कर जान दे दी।

पांच अक्टूबर को रानी दुर्गावती की जयंती है। Vijayrampatrika.com इस मौके पर एक विशेष सीरीज के तहत बताने जा रहा है इस वीरांगना से जुड़ी हर वह बात जो जानना चाहते हैं आप।

राजा की मौत के बाद खुद संभाली बागडोर
जिस दिन रानी दुर्गावती का जन्म हुआ था उस दिन दुर्गाष्टमी थी (5 अक्टूबर 1524)। इसी कारण उनका नाम दुर्गावती रखा गया। उनका जन्म बांदा (कालांजर) यूपी में हुआ था, वह चंदेल वंश की थीं। 1542 में उनका विवाह दलपत शाह से हुआ। दलपत शाह गोंड (गढ़मंडला) राजा संग्राम शाह के सबसे बड़े पुत्र थे। विवाह के कुछ साल बाद ही दलपत शाह का निधन हो गया। उस समय उनके पुत्र वीरनारायण छोटे थे, ऐसे में रानी दुर्गावती को राजगद्दी संभालनी पड़ी।

वह एक गोंड राज्य की पहली रानी बनीं। अकबर चाहता था कि रानी मुगल साम्राज्य के अधीन अपना राज्य कर दें। अकबर ने रानी दुर्गावती पर दबाव डाला, लेकिन महारानी दुर्गावती ने जंग लड़ना पसंद किया।
दिए गए फोटोज़छुएं और अंदर स्लाइड्स में पढें दुर्गावती की पूरी कहानी। जानें ये भी कि चाहता क्या था अकबर...

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