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भारत में चले थे सबसे पहले परमाणु अस्त्र? इस थ्योरी पर अमेरिकन ने किए बम टेस्ट

》दुनियां 360° Desk: खबरों में परमाणु हथियारों के जखीरे देख लगता है कि तीसरा विश्व युद्घ होने वाला है। आज अमेरिका सहित कर्इ देशों के पास विनाशकारी बम मौजूद हैं। इन हथियारों का केवल परीक्षण ही नहीं हुआ, बल्कि इनकी विभीषिका भी सामने आ चुकी है। जापान, पश्चिम एशिया, अफगानिस्तान में अमेरिका ने परमाणु अस्त्र यूज किए। जिनकी बदौलत वह, हजारों किलोमीटर Top Powerful Spiritual & Physical Weapons from Ancient दूर रहते हुए भी दुश्मन पर काबिज हो गया। लेकिन क्या आप जानते हैं, परमाणु अस्त्र सबसे पहले कहां प्रयोग किए गए थे, प्रथम परमाणु बम कहां बना था?

हिंदुधर्म ग्रंथ महाभारत में ऐसे कर्इ सवालों के जवाब मिलते हैं। जिनमें सर्वप्रथम विमान उडा़ने से लेकर परमाणु अस्त्रों द्वारा लडी़ लडाइयां प्रमुख हैं। मगर दुनिया इस बात से कभी रूबरू नहीं हुर्इ कि विनाशकारी अस्त्र-शस्त्र सर्वप्रथम भारत में ही बने। लेकिन अमेरिका के सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी जे. रॉबर्ट ओपनहाइमर ने दुनिया को यह बताने की कोशिश की। रॉबर्ट ने गीता-महाभारत के अध्ययन के बाद अपने शोध में स्पष्ठ कर दिया कि, ऐसे हथियार महाभारत के दौरान चले थे।

Vijayrampatrika.com आज़ यहां आपको महाभारतकाल की वो बातें बताने जा रहा है, जो कम ही लोग जानते होंगेे। कहां सबसे पहले क्यों परमाणु अस्त्र-शस्त्रों का यूज हुआ,
कितने विनाशकारी थे तब के हथियार, कैसे उन्हें प्राप्त किया जाता था. जानिए इधर…..

जब अमेरिका ने बनाया परमाणु बम
Ancient Weapons of Mass Destruction & The Mahabharata
सन, 1939 से 1945 के बीच जे. रॉबर्ट ने महाभारत में बताए गए ब्रह्मास्त्र की संहारक क्षमता पर रिसर्च किया। वैज्ञानिकों की टीम ने इस मिशन को ट्रिनिटी (त्रिदेव) नाम दिया। जिसके फलस्वरूप 16 जुलाई (1945) के दिन उन्होंने परमाणु बम का परीक्षण किया। इसी तरह 1969-70 के दौरान पुणे के एक राइटर डॉ. पद्माकर विष्णु वर्तक ने एक किताब लिखी ‘स्वयंभू’। जिसमें वर्तक ने कहा था कि महाभारत के समय जो ब्रह्मास्त्र इस्तेमाल किया गया था वह परमाणु बम के समान ही था। उससे पहले रामायणकाल में भी ब्रह्मास्त्र का वर्णन मिलता है, यानि प्राचीन भारत में महाविनाशकारी अस्त्र सबसे पहले अस्तित्व में आए।

गैलरी के फोटोज़ पर क्लिक करके अंदर स्लाइड्स में पढें परमाणु अस्त्रों की प्राप्ति, विकास और इस्तेमाल से जुडी़ बातें…..

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HISTORY: जानिए किसने इंसान को सबसे पहले दिया था उड़ान का आनंद

balloonआज एडवेंचर स्पोर्ट्स से लेकर मौसम पर निगाह रखने तक में इस्तेमाल होते हैं हॉट एयर बैलून। दो फ्रांसीसी भाइयों द्वारा 232 साल पहले किए गए इस आविष्कार ने ही इंसान को सबसे पहले दिया था उड़ान का आनंद…

वह वर्ष 1782 के दिसंबर महीने की एक सर्द सुबह थी। फ्रांस में रहने वाले दो भाई जोसेफ और एटिएन मांटगोल्फियर अलाव के पास बैठे आग ताप रहे थे। ऊपर की ओर उठता धुंआ देखकर जोसेफ के दिल में एक ख्याल आया। ‘गर्म हवा हमेशा ऊपर की ओर उठती है भाई। क्या हम इसका इस्तेमाल करके कोई ऐसी चीज बना सकते हैं, जिसमें बैठकर इंसान उड़ सके?’ जोसेफ ने एटिएन से कहा। इस एक छोटे से विचार ने मानव सभ्यता में विज्ञान का नया अध्याय ही खोल दिया। हां सच बच्चो, धुन के पक्के उन मांटगोल्फियर भाइयों ने दुनिया का पहला ‘हॉट एयर बैलून’ बना डाला और इसके लगभग ग्यारह महीनों बाद (21 नवंबर 1783) उनके हॉट एयर बैलून ने पेरिस में दो इंसानों जीन फ्रैंकोइस और फ्रैंकोइस लॉरेंट को लेकर पहली उड़ान भरी। यह करिश्मा राइट ब्रदर्स द्वारा दुनिया में हवाईजहाज की पहली उड़ान से लगभग 120 साल पहले हुआ था!

Mantgolfiyr brothersएयरशिप्स का आगमन
हवा से हल्की गैस हीलियम और रेशमी कपड़े से ज्यादा सुविधाजनक नॉयलान की जानकारी होने के बाद बीसवीं शताब्दी के मध्य में हॉट एयर बैलून्स का एक नया अवतार सामने आया। अमेरिकी आविष्कारक पॉल एडवर्ड योस्ट ने दुनिया के सामने आधुनिक और अधिक सुरक्षित हॉट एयर बैलून पेश कर जैसे एक क्रांति ला दी। यह एडवेंचर स्पोर्ट्स से लेकर पब्लिसिटी और मौसम का हाल जानने तक में प्रयोग किए जाने लगे। लगभग इसी वक्त ‘एयरशिप्स’ भी सामने आए। इन्हें यह नाम इसलिए दिया गया क्योंकि यह हीलियम का प्रयोग करके हवा में उड़ते हैं और हॉट एयर बैलून की तुलना में बहुत ऊंची और कई दिनों की यात्र कर सकते हैं। एयरशिप का ऊपरी विशाल भाग दरअसल नॉयलान का बना एक बहुत बड़ा हीलियम भरा गुब्बारा होता है जिसे ‘एनवेलप’ कहते हैं!

उड़ चली चिट्ठी
हॉट एयर बैलून का प्रयोग सफल होने के बाद लोगों के मन में इसके कई इस्तेमाल कौंधने लगे। तब लोगों के पास एक-दूसरे की खोज-खबर लेने के लिए चिट्ठी भेजना ही एकमात्र तरीका था और इसमें बहुत दिन लग जाते थे। पता है पाठको, दुनिया की पहली ‘एयर मेल’ हॉट एयर बैलून का प्रयोग करके ही भेजी गई थी। तारीख थी 7 जनवरी 1785 और देश था फ्रांस। अब तीन पिक्चरों पर क्लिक कर स्लाइड़स में अंदर जानिए हॉट एयर बैलून की साइंस, हीलियम गैस व एडवेंचर स्पोर्ट्स के बारे में

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महाराष्ट्र का मशहूर हिल स्टेशन है ये, कभी यहां भीम ने मारा था कीचक को

 महाभारत काल से है ये खाई, भीम ने यहीं लिया था द्रौपदी के अपमान का बदला》WORLD TOURISM Desk : आप देख रहे हैं महाराष्ट्र के विदर्भ में बसा चिखलदरा हिल स्टेशन। मान्यता है कि महाभारत के समय पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान यहां कुछ बिताया था। अज्ञातवास के दौरान महाभारत के कीचक नाम के पात्र ने द्रौपदी से अनैतिक व्हवहार की कोशिश की थी। इस पर गुस्साए भीम ने उसे मारकर इसी खाई में फेंक दिया था। आज भी ये खाई महाभारत काल में हुए उस घटना की गवाह है। यहां आने वाले पयर्टकों को महाभारत से जुड़ी रोचक जानकारियां भी यहां मिलती हैं।

Keechakadara known as —Chikhaldara. which is located in Amravati district of Maharashtra.
चिखलदरा हिल स्टेशन नैसर्गिक सौन्दर्यता के अलावा पौराणिक स्थलों के लिए मशहूर है। उल्लेखनीय है कि चिखलधरा को पौराणिक काल में विराट नगर भी कहा जाता था। अज्ञातवास के दौरान यहां के राजा विराट की रानी सुदेष्णा ने द्रौपदी और पांडवों को काम पर रखा था। कीचक ही रानी सुदेष्णा का भाई था, जिसने द्रौपदी के साथ अनैतिक व्यवहार किया था। कीचक के वध के बाद से ही इस स्थान का नाम चिखलधरा पड़ा।

इस हिल स्टेशन सहित इंडिया के मशहूर अन्य डेस्टिनेशन घूमने के लिए ये लिंक क्लिक करें….
रॉबिन्सन द्वारा खोजा गया था ये हिलस्टेशन, इंडिया में मशहूर OffBEAT
महाभारत काल से है ये खाई, द्रोपदी के पति ने लिया था अपमान का बदला
इंडिया की कुछ ऐसी जगहें जहां, आप मानसून का भरपूर लुत्फ ले सकते हैं
सालभर हरी-भरी रहती हैं लोनावाला-खंडाला की घाटियां, बहते हैं झरने

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