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ये 5 काम पक्की करते हैं नरक में जगह ..! रहें बेहद सावधान

ये है जीने का सही तरीका, रहें इन 5 से सावधान! 》जीवन दर्शन Desk. जीवन में सुख और दु:ख के पीछे बोल, कर्म और बर्ताव में अच्छाई-बुराई या गुण-दोष कारण होते हैं। धार्मिक नजरिए से अधर्म या बुरे कर्म पाप तो धर्म या अच्छे कर्म पुण्य देते हैं। जिनके आधार पर प्राणी मृत्यु के बात स्वर्ग और नरक को प्राप्त करता है। इस तरह स्वर्ग सुख और नरक दु:ख के प्रतीक भी है।
यही कारण है कि दु:ख व दरिद्रता से घिरा जीवन नारकीय और सुख-समृद्ध जीवन स्वर्ग सा सुख देने वाला भी माना जाता है।

हर इंसान ऐसे वैभव की इच्छा रखता है, किंतु शास्त्रों के मुताबिक कलियुग में हावी कलह राग-द्वेष पैदा करता है। जिससे व्यक्ति सुखों की चाहत में भी जाने-अनजाने गलत काम कर नरक की ओर कदम बढ़ाता है यानी दु:ख के बीज बोता है। जिनसे बचने के लिए कर्म, वचन और व्यवहार से जुड़ी कुछ बातों के प्रति सावधान होना जरूरी बताया गया है। जानते हैं ये बातें –

हिन्दू धर्मग्रंथों में इंसान के ऐसे अनेक दोष भी बताएं गए हैं, जो नरकगामी कहे गए हैं। ऐसे दोषयुक्त व्यवहार करने वाले व्यक्तियों के अलग-अलग नाम भी बताए गए है। जानें, कैसे होते हैं ये 5 लोग?

1. विषम – जो सामने मीठे बोल बोले और पीछे कटु वचन। जिनकी कथनी और करनी में फर्क हो।
2. पिशुन – कपट, झूठ, छल, शक्ति या प्रेम के दिखावा कर ठगने वाला।
3. अधम – जो गुरु से ऊंचे स्थान पर बैठे, देवता के सामने जूता और छतरी लेकर जाए। आधुनिक संदर्भ में बड़ों का सम्मान न करने वाला या धर्म से विमुख या निंदक।
4. पशु – व्यावहारिक दृष्टि से मात्र सांसारिक इच्छाओं को पूरा करने की चाहत रख हर काम करने वाला। देव सेवा व शास्त्रों के ज्ञान से दूर। धार्मिक दृष्टि से प्रयाग में रहते हुए भी स्नान न करने वाला।
5. कृपण – जो क्रोध कर देव पूजा व दान करे। यह नहीं धार्मिक व पितृ कर्मो में अन्न-धन से संपन्न होने पर भी निम्र स्तर का भोजन कराने वाला।

कहा गया है कि ऐसे स्वभाव व दोष वाले व्यक्तियों को न तो स्वर्ग मिलता है न ही मोक्ष। इसलिए ऐसे दोष और व्यक्तियों से बचकर पवित्र भावों से जीवन गुजारने पर ही सुखों के रूप में जीते-जी बैकुण्ठ का आनंद पाया जा सकता है।
– अगर आपकी धर्म और उपासना से जुड़ी कोई जिज्ञासा हो या कोई जानकारी चाहते हैं तो इस आर्टिकल पर टिप्पणी के साथ नीचे कमेंट बाक्स के जरिए हमें भेजें#Vijayrampatrika.Com/ Comment boX

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बसंत का मौसम और सूर्य की सतरंगी किरणें, ये है TACFUL तितलियों की आहट

Spring Weather_Butterflies show in this Seasonबसंत पुष्पों की खुशबू का मौसम है। इसमें सबसे अधिक तितलियां दिखती हैं। बागों में जाओगे तो तुम्हें भी आसानी से ये दिख जाएंगी। रंग-बिरंगी, खूब सारे डिजाइन वाली, कभी इस फूल तो कभी उस फूल बैठती तितली को पकड़ लेने का मन करता है। अगर तुम्हें भी तितली पसंद है तो तुम्हें उसके बारे में और जानने की कोशिश करनी चाहिए। देश में कई तरह की तितलियां मिलती हैं और हाल में कई नई प्रजातियों की पहचान भी हुई है। आज यहां जानिए तितलियों के बारे में विस्तार से।

एक्सपर्ट कहते हैं कि बरसात का मौसम बीत जाने के बाद बटरफ्लार्इ दिखने लगती हैं। फरवरी व मार्च में आप इन्हें महकते फूलों पर उड़ते हुए आसानी से देख सकते हैं। नैनीताल, जयपुर, मथुरा, दिल्ली व उदयपुर के बाग इस मौसम में इन्हीं के हैं। अच्छे प्राकृतिक वातावरण में न केवल इनकी संख्या बढ़ जाती है, बल्कि वैरायटी भी काफी दिखती हैं। यानी अलग-अलग आकार व रंगों की तितलियों को तुम देख सकते हो। वाइल्ड लाइफ साइंटिस्टों से भी इनके बारे में जाना जा सकता है। पिछले कुछ सालों में दुनिया में जहां तितलियां विलुप्त हो रही हैं, वहीं दिल्ली में संख्या में इजाफा हुआ है। 2012 में तो यमुना बायो डायवर्सिटी पार्क और अरावली बायोडायवर्सिटी पार्क में संरक्षित की जा रही तितलियां भी देखी गर्इं थीं। अरावली में करीब 95 प्रतिशत और यमुना में 70 प्रजातियां देखी गई थीं।

Spring Weather_Butterflies show in this Seasonकभी-कभी ही दिखती हैं ये तितलियां
1) कॉमन जेजबेल
2) ग्लासी टाइगर
3) टेल्ड जे
4) ब्लैक राजाह
5) साउदर्न एल्बाट्रॉस निगर

अकसर नजर आ जाती हैं ये तितलियां
1) डेनेड एगफ्लाई
2) प्लेन टाइगर
3) पीकॉक पेंसी
4) कॉमन रोज
5) ब्ल्यू पेंसी

नेशनल केपिटल में आप यहां देख सकते हो तितलियों को…
» यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क, मिलन विहार
» लोदी गार्डन
» जेएनयू
» ओखला बर्ड सेंक्चुरी, नोएडा
» संजय वन, वसंत कुंज
» असोला भट्टी वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी
» अरावली
» बायोडायवर्सिटी पार्क, गुड़गांव । अब दिए इन सात फोटोज को छुएं । स्लाइड्स पर क्लिक कर अंदर जानिए तितलियों की दुनिया । उनकी आदतें, मुस्कराहटें, उडने की कला व बनावटें…

Natural beauty pics» Www.vijayrampatrika.com

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जीवन में कुछ करने के लिए याद जरूर रखनी चाहिए ये बात, परमहंस योगानंद द्वारा हैं चरितार्थ

 motivational context of 5 sages on vijayrampatrika.com  जिसने धरती पर जन्म लिया है, उसके कोर्इ न कोर्इ उद्देश्य जरूर होते हैं। वह लोग जो ज्ञान का सद्पयोग करते हैं, वास्तव में बहुत कुछ पा लेते हैं। लेकिन जो समझ नहीं पाते सिर्फ स्वार्थ की खातिर, वे जीकर भी मर जाते हैं। यहां याद करें वह आध्यात्मिक किस्सा, जब परमहंस योगानंद के एक शिष्य को एक काम करने को कहा गया। यह काम उसकी क्षमता से बाहर का था। उसने अपने गुरु के सामने विरोध किया। कहा कि मैं यह काम नहीं कर सकता। परमहंसजी ने तत्काल जवाब दिया- ‘मैं तो कर सकता हूं!’ शिष्य ने जवाब दिया, ‘लेकिन गुरुदेव आप योगानंद हैं, आप भगवानों में से एक हैं।’ तब गुरु परमहंस योगानंद ने जवाब दिया, ‘योगानंद और आपमें सिर्फ एक अंतर है। मैंने कोशिश की, अब आपको भी एक कोशिश करनी होगी।’

सच्चा गुरु कभी भी शिष्य की कमजोरी सामने लाते हुए अपने आपको श्रेष्ठ साबित करने की कोशिश नहीं करता। वह शिष्य की गलतियों को देखता है। उन्हें पहचान कर दूर करने की कोशिश करता है। लेकिन उनके आधार पर उसकी खिंचाई नहीं करता। दूसरी ओर, वह शिष्य को अपनी कमजोरियों को दिमाग से निकालकर अच्छे गुणों को विकसित करने के लिए प्रेरित करता है।

किसी और के सामने शिष्य की बुराई या लापरवाही को सामने लाना गुरु का गुण नहीं है। जब भी हम स्लिप होते हैं, गुरु बिना किसी परेशानी के अपना हाथ बढ़ाकर हमें ऊपर उठाते हैं। किसी भी तरह की सीख वन-टू-वन आधार पर होती है। यदि वह आपकी ओर बढ़ाए हाथ की पब्लिसिटी करता है तो निश्चित तौर पर वह आपके अवगुणों को प्रचारित करेगा, भले ही आप उनसे सालभर पहले उबर चुके हों। एक सच्चा गुरु कभी आपको लेकर निराश नहीं होता।

श्री युक्तेश्वर गिरि ने अपने शिष्य परमहंस योगानंद को कहा था, ‘मैं अंदरूनी तौर पर अब तुम्हारा मित्र रहूंगा। फिर चाहे आपकी मानसिक स्थिति बहुत अच्छी हो या नहीं। यदि तुम गलती करोगे, तो भी मैं तुम्हारा मित्र ही रहूंगा। उस समय तुम्हें मेरी मित्रता की सबसे ज्यादा जरूरत पडऩे वाली है।’ गुरु हमेशा हमारे साथ होते हैं (शारीरिक तौर पर नहीं मानसिक और आध्यात्मिक तौर पर)। हमेशा हमारी ओर मदद के लिए हाथ बढ़ाते हैं। वह अपने शिष्यों को सवाल पूछकर तरक्की करने के मौके देते हैं।

वह कभी भी अंधानुकरण की मांग नहीं करते, लेकिन उनके सच्चे भक्त उनकी हर बात को पूरी निष्ठा के साथ करते हैं। एक सच्चा गुरु कभी भी अपने भक्तों को अहंकारी शब्दों के साथ फटकार नहीं लगाता। कभी यह नहीं जताता कि उसे शिष्यों से ज्यादा ज्ञान है। वह जानता है कि भगवान उससे ज्यादा जानता है। रौशनी का अनुभव करने के लिए यह अंधकार जरूरी है। ऐसी ही तमाम प्रेरक कहानियां, विचार –इंफीनी मैगजीन में।

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