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ये है भारत का सबसे लंबा किला, एक नहीं 7 दरवाजों से कर सकते हैं एंट्री

 Did you know that 18 April is World Heritage Day?》WORLD TOURISM Desk: राजस्थान ने सदा ही अपनी प्राचीनता और खूबसूरती से लोगों को प्रभावित किया है। यह धरती हमेशा से ही विदेशी टूरिस्टों को आकर्षित करती रही है। यहां के किले वर्ल्ड फेमस हैं, जिनकी महत्वता ने उनका नाम इतिहास में दर्ज करा दिया।

Vijayrampatrika.com ‘किले राजस्थान के’ सीरीज के तहत आज आपकाे बता रहा है, चित्तौड़गढ़ के दुर्ग के बारे में।

वर्ल्ड हैरिटेज डे स्पेशल
भारत सहित दुनियाभर में 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस मनता है। यह दिन विश्व संपदा के संरक्षण और उनसे जुडे़ केयरटेकर्स को प्रोत्साहित करने के लिए सेलिब्रेट किया जाता है। सालभर में यूनेस्को लोगों के बीच पॉपुलर हो रही जगहों को एक लिस्ट में शामिल करती है, जिन्हें वर्ल्ड हैरिटेज साइट कहा जाता है। इसके तहत उन साइट्स की सुरक्षा-संरक्षा पुख्ता करने पर जोर रहता है। अपने देश से भी कर्इ धरोहर वर्ल्ड हैरिटेज का दर्जा पा चुकी हैं और आगे भी ऐसी कोशिशें होती रहेंगी। वर्ष 2013 में विश्व धरोहर समिति के 37 वें सत्र के दौरान राजस्थान के पांच किलों को विश्व विरासत स्थल घोषित किया गया था। उन्हीं में से एक है चित्तौगढ़ फोर्ट : –

भारत का सबसे लंबा किला:
Chittorgarh Fort & gaumukh reservoir
लगभग 700 एकड़ में फैले और 500 फुट की ऊंचाई वाली पहाड़ी पर स्थित इस किले की बनावट बहुत ही शानदार है। यही वजह है कि इसे भारत का सबसे लंबा किला भी कहा जाता है। इतना ही नहीं, दुर्ग फोर्ट पहुंचना भी किसी सुखद यात्रा से कम नहीं है। एक खड़े और घुमावदार मार्ग से होकर जाना आनंद की अनुभूति कराता है। इस किले में सात दरवाजे हैं, जिनके नाम हिंदू देवताओं के नाम पर पड़े हैं। इनके नाम हैं पैदल पोल, भैरव पोल, हनुमान पोल, गणेश पोल, जोली पोल, लक्ष्मण पोल और अंत में राम पोल।

फोटोज़ छुएं और अंदर स्लाइड्स में पढें: इस किले में क्यों बनाए 7 दरवाजे?
महल के अंदर से कैसे कांच की दीवारों से रानी को स्विमिंग पूल में नहाने देखता था सुल्तान?
इस किले में हैं मंदिर-मस्जिद, मुगलों से लाज़ बचाने को हजारों महिलाओं ने गंवार्इ जान !

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क्रिसमस संग न्यू ईयर पार्टी के लिए बेस्ट हैं इंडिया के ये 5DESTINATION

Christmas Celebration With New Year Is Fantastic Idea So Plan These 5 Indian Destination For Party.》WORLD TOURISM Desk: क्रिस्मस का फेस्टिवल न्यू ईयर के बहुत ही करीब होता है जिसके चलते अधिकतर लोग कोशिश करते हैं किसी ऐसी जगह सेलिब्रेट करने की जिससे एक साथ दोनों काम हो जाए। तो अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं तो प्लान बनाएं ऐसी जगहों का, जहां शांति और सुकून के साथ क्रिसमस और न्यू ईयर को एन्जॉय किया जा सकता है।

List of Top 5 Best & Famous Churches in India
इंडिया में इसके लिए वैसे तो बहुतेरे डेस्टिनेशन्स हैं, लेकिन उनमें से 5 तो इन्हीं दो इच्छाओं को पूरा करने के लिए। जैसे कि गोवा के बीच और उत्तराखंड में हिल स्टेशन नियर चर्च। यहां शांत से चर्च में जाकर प्रार्थना करने और उसके बाद वहां के नजारों का मजा लेने के लिए बेस्ट हैं ये सारी जगहें। ये चर्च इतने खूबसूरत हैं कि इन्हें देखकर यूरोपियन चर्चों का अहसास होता है।

1. सेंट जॉन चर्च, नैनीताल
St. John Church Nainital
सेंट जॉन चर्च इन वाइल्डरनेस, एक शांत जगह है जो मल्लीताल (नैनीताल के उत्तरी छोर) में स्थित है। इस चर्च को जंगल में सेंट जॉन के रूप में भी जाना जाता है। यह चर्च 1880 के भूस्खलन में शिकार हुए लोगों के एक स्मारक के रूप में भी कार्य करता है, जहां एक पीतल की पट्टिका में शिकार हुए लोगों का नाम लिखा हुआ है। नैनीताल भली-भांति देश के विभिन्न भागों से सड़क, रेल और वायु मार्ग से जुड़ा हुआ है।

क्रिसमस एंड न्यू ईयर सेलिब्रेशन के लिए फेमस अन्य डेस्टिनेशंस के लिए छुएं फोटोज, अंदर स्लाइड्स में पढें....
Other news: न्यू ईयर सेलिब्रेशन के लिए घूम सकते हैं ये 10 जगहें
दुनिया के 10 सबसे खूबसूरत चर्च, किसी का लुक मंदिर सा तो कोर्इ दिखता है महल जैसा

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अद्भुत है इस झरने का आकर्षण, कभी गौतम बुद्ध ने किया था यहां स्नान

Jharkhand Tourism: Jonha Falls,Ranchi Complete Tour ...》दुनियां 360° news Desk: झारखंड की राजधानी रांची को झरनों का शहर भी कहते हैं। यहां कई झरने हैं। इनमें से एक है जोन्हा। इसे गौतमधारा के नाम से भी जाना जाता है। गर्मियों के दिनों में तो यह लगभग सूख जाता है लेकिन बरसात के समय इसकी खूबसूरती देखते ही बनती है। इन दिनों भी इसके आकर्षक रूप को देखने के लिए पर्यटकों की भीड़ उमड़ रही है। साथ ही नए साल में तो मेला सा माहौल हो जाता है। पिकनिक स्पॉट के रूप में इसे बेहद पसंद किया जाता है।

15 नवंबर को राज्य का स्थापना दिवस है। इस मौके पर Vijayrampatrika.com आपको दिखाएगा ‘झारखंड की खूबसूरती’। आज हम बता रहे हैं रांची स्थित एक ऐसे झरने के बारे में जो गौतम बुद्ध से जुड़ा हुआ है…

गौतम बुद्ध ने किया था स्नान इसलिए कहते हैं गौतमधारा भी
Jharkhand Tourism: Jonha Falls & Gautamdhara
इस फॉल का नाम पास के एक गांव पर पड़ा है। जोन्हा फॉल को गौतम धारा के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि गौतम बुद्ध ने यहां स्नान किया था। गौतमधारा के एक छोर पर बुद्ध को समर्पित एक मंदिर और एक आश्रम है, जिसे राजा बालदेवदास बिरला के बेटों ने बनवाया था।

लगता है मेला
हर मंगलवार और गुरुवार को यहां लगने वाला मेला भी पर्यटकों के बीच काफी चर्चित है। गर्मी के दिनों में यह सूख जाता है और जैसे ही बरसात शुरू होती है, झरना फिर बहने लगता है। अब दिए गए फोटोज़ को छुएं और झरने के खासियतों के बारे में अंदर स्लाइड्स में पढें...

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इस भूल भुलैया में दफन है अरबों का खजाना, जो भी गया अंदर नहीं लौटा वापस

रहस्यमयी 'चोरों की बावड़ी'- क्या इसमें दफन है ...》WORLD TOURISM Desk: हरियाणा के महम में ‘चोरों की बावड़ी’ की इतिहास में खास जगह बनी हुई है। इसे ‘स्वर्ग का झरना’ भी कहा जाता है। मुगलकाल की यह बावड़ी यादों से ज्यादा रहस्यमयी किस्से-कहानियों के लिए जानी जाती है। कहा जाता है कि सदियों पहले बनी इस बावड़ी में अरबों रुपए का खजाना छुपा हुआ है, यही नहीं इसमें सुरंगों का जाल है जो दिल्ली, हिसार और लाहौर तक जाता है? लेकिन इन बातों का इतिहास में कहीं कोई उल्लेख नहीं मिलता। कुछ ऐसे ही प्रश्न हैं जो आज भी लोगों के लिए रहस्य बने हुए हैं।

Vijayrampatrika.com हरियाणा के स्थापना दिवस (1NOV) के मौके पर राज्य के गौरवशाली इतिहास, संस्कृति, कला, विकास और सुनी-अनसुनी कहानियों से आपको अवगत कराएगा। इस कड़ी में आज पढें, महम की ‘चोरों की बावड़ी’ के बारे में जिसे शाहजहां द्वारा बनवाया गया था।

बावड़ी में है सुरंगों का जाल
Choron ki baoli in meham haryana
बावड़ी में लगे फारसी भाषा के एक अभिलेख के अनुसार इस स्वर्ग के झरने का निर्माण उस समय के मुगल राजा शाहजहां के सूबेदार सैद्यू कलाल ने 1658-59 ईसवी में करवाया था। इसमें एक कुआं है जिस तक पहुंचने के लिए 101 सीढिय़ां उतरनी पड़ती हैं। इसमें कई कमरे भी हैं, जो कि उस जमाने में राहगीरों के आराम के लिए बनवाए गए थे। सरकार द्वारा उचित देखभाल न किए जाने के कारण यह बावड़ी जर्जर हो रही है। इसके बुर्ज व मंडेर गिर चुके हैं। कुएं के अंदर स्थित पानी काला पड़ चुका है।

ज्ञानी चोर ने दफनाया अरबों का खजाना
इस बावड़ी को लेकर वैसे तो कई कहानियां गढ़ी गई है, लेकिन इनमें प्रमुख है ज्ञानी चोर की कहानी। कहा जाता है कि ज्ञानी चोर एक शातिर चोर था जो धनवानों का लूटता और इस बावड़ी में छलांग लगाकर गायब हो जाता और अगले दिन फिर राहजनी के लिए निकल आता था। लोगों का यह अनुमान है कि ज्ञानी चोर द्वारा लूटा गया सारा धन इसी बावड़ी में मौजूद है। दिए गए फोटोज़ छुएं और अंदर स्लाइड्स में पढें किसका था खजाना, क्यों उसे ढूढ़ने जाने वाले की हो जाती है मौत…..

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मुमताज-शाहजहां के प्रेम का गवाह है शाही किला, यहीं हुई थी बेगम-ए-खास की मौत

Burhanpur. Boatmen punt in the Tapti River beside the Shahi qila.》WORLD TOURISM Desk: प्रेम के सबसे बड़े प्रतीक ताजमहल को बनवाने वाले शाहजहां और बेगम मुमताज महल की बेहद रोमांटिक यादें मध्य प्रदेश के बुरहानपुर से भी जुड़ी हैं। शाहजहां ने आगरा का ताजमहल तो अपनी प्रिय बेगम की मौत के बाद उनकी याद में बनवाया था, लेकिन शाहजहां और मुमताज बेगम का प्यार तो बुरहानपुर में बने फारुखी काल के शाही किले में ही परवान चढ़ा था। इस किले की दरों-दीवारें ही नहीं कमरों से लेकर दालान और हमाम तक आज भी शाहजहां और मुमताज के हसीन प्यार के गवाह हैं।

Burhanpur and the story of Shahi Qila
27 सितंबर के दिन वर्ल्ड टूरिज्म डे मनाया जाता है। इस मौके पर Vijayrampatrika.com आपको बता रहा है भारत की कुछ ऐसी जगहों के बारे में जहां लोग अक्सर घूमने पहुंचते हैं। इस कड़ी में हम आज बताने जा रहे हैं बुरहानपुर के शाही किले के बारे में।

यहां आलीशान कक्षों में रात बिताते थे बादशाह
बतौर बुरहानपुर गवर्नर शाहजहां इस किले में लगभग पांच वर्ष तक रहे। यह किला शाहजहां को इतना पसंद था कि अपने कार्यकाल के पहले तीन वर्षों में ही उन्होंने किले की छत पर दीवाने आम और दीवाने खास नाम से दो दरबार बनवा दिए थे। शाहजहां ने किले में इस सबसे अलहदा एक ऐसी चीज बनवाई थी, जहां वे अपनी बेगम के साथ सुकून के पल बिताते थे। मुमताज की मौत भी बुरहानपुर में ही हुई थी। शायद बहुत कम लोग यह जानते होंगे की ताजमहल बनने तक मुमताज का मृत शरीर यहीं दफनाया गया था

ऐसा है किले का इतिहास :
सन् 1603 ई से मुगल बादशाह के आगमन का क्रम निंरतर जारी रहा था। शाहजहां बुरहानपुर के सूबेदार थे। 1621 ई में दक्षिण के आक्रमण के सिलसिले में वह कई वर्ष तक यहां रहे थे। इस अवधि में अनेक शानदार इमारतें बनवायी गयीं। विशेषकर दीवान-ए-आम बनवाया गया। तीन वर्षों तक यहीं दरबार सजाया गया। शाहजहां के अतिरिक्त भी अन्य मुगल बादशाहों का इसमें निवास रहा।

औरंगजेब, मोहम्मद शुजा और शाह आलम ने भी इस किले में निवास किया था। इसी महल में मुमताज महल ने चौदहवें बच्चे को जन्म दिया और यही सात जून 1639 ई के प्रात: काल होने से पूर्व शाहजहां की गोद में अपनी जिंदगी की अंतिम सांस ली। उन्हें ताप्ति नदी के किनारे जैनाबाद के प्रसिद्ध बाग में दफनाया गया था।

यहां गैलरी में अंदर देखें शाही किले के फोटोज…

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