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Really? इस किले में कुत्ता चलाता था तोप, गोले दागने को बने हैं 446 छेद

Bala Quila》WORLD TOURISM Desk: राजाओं की लडा़र्इ में आपने तोपचियों के तो तोप चलाने के बारे में सुना होगा। लेकिन आपको पता है कि राजस्थान में एक ऐसा किला भी है जहां से कुत्ता दागता था दुश्मन पर गोले? ये कहावत नहीं बल्कि हकीकत है।

Bala Quila – Alwar in Hindi
अलवर के बाला किले के पास पहाडी़ पर बने तोप-खाने में ऐसा होता था। किले से करीब दो सौ मीटर पहले सड़क के किनारे खंडहरनुमा इमारत दिखाई देती है। यह तोप का कारखाना है। इसमें राजाओं के शासनकाल के दौरान तोप का निर्माण किया जाता था। यहां की बनी हुई तोपों का परीक्षण यहीं होता था। खास बात यह है कि इन परीक्षण में तोपों के फटने और उनके साइड इफेक्ट के बड़े नुकसान थे। ऐसे में एक कुत्ते को ट्रेंड किया गया, जिसका नाम था विक्टर। यह कुत्ता तोप चलाने के बाद वहां बने पानी के कुंड में तेजी से छलांग लगा देता था।

तोप फटने से हो गर्इ मौत
एक बार यहां एशिया महाद्वीप की दूसरी सबसे बड़ी तोप बनाई गई। इसका परीक्षण भी विक्टर को ही करना था। इससे पहले कि विक्टर तोप चलाने पर कुंड में कूदता, तोप फट गई। इस विस्फोट से विक्टर की मौत हो गई। विक्टर की याद में तोपखाना परिसर में उसकी समाधि बनाई गई। इसके साथ ही विक्टर का नाम इतिहास में दर्ज हो गया।

दिए गए फोटोज़ छुएं और अंदर स्लाइड्स में पढें बाला किले में क्यों बनाए 446 छेद, क्यों कहा जाता है इसे कुंवारा किला…

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चाय के बागानों और वाइल्ड लाइफ सैंक्चुअरी से सजा है दोआर का इलाका

Assam tourism》WORLD TOURISM Desk: यदि आप खूबसूरत नजारों का मजा लेना चाहते हैं तो पूर्वोत्तर भारत एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। यहां की नेचुरल ब्यूटी को हर मौसम में निहारा जा सकता है। इस बार चलते हैं हिमालय की तलहटी में बसे दोआर क्षेत्र में।

Vijayrampatrika.com बता रहा है यहां की खासियत के बारे में। आपको यह टूर अवश्य पसंद आएगा, जब नेचुरल लव मन में होने लगेगा….!

दोआर/Assam tourism
दोआर या दुआर पूर्वोत्तर भारतीय इलाका है, जो हिमालय की तलहटी में बसा है। संकोस नदी इसके 8,800 वर्गमील एरिया को वेस्ट और ईस्ट दोआर में बांटती है। भूटान के आसपास पूर्वोत्तर भारत में बाढ़ के मैदान ईस्ट हिमालय की तलहटी कहलाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस इलाके में अनेक दर्रे हैं जो हिमालय को जाते हैं। दोआर का मतलब नेपाली, असमिया, मैथिली, भोजपुरी, मगही, और बंगाली भाषाओं में दरवाजा होता है। इसे भारत से भूटान के लिए एंट्री डोर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

पुराने जमाने में भूटान के लोग मैदानी इलाकों में रहने वाले लोगों के साथ 18 मार्गों के माध्यम से संपर्क कर सकते थे। पश्चिमी असम स्थित पूर्वी दोआर में समतल मैदान है, जो अनेक नदियों द्वारा बंटा हुआ है और वहां की जनसंख्या बहुत कम है। पश्चिमी दोआर पश्चिम बंगाल के नॉर्थ में स्थित है और यह मैदानी इलाके व हिमालय से जुड़े तराई क्षेत्र का एक हिस्सा है।

दोआर में घूमने वाली जगहें और खरीददारी करने वाली चीजों के बारे में जानने के लिए छुएं फोटोज, अंदर स्लाइड्स में पढें …

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ये है भारत का सबसे लंबा किला, एक नहीं 7 दरवाजों से कर सकते हैं एंट्री

 Did you know that 18 April is World Heritage Day?》WORLD TOURISM Desk: राजस्थान ने सदा ही अपनी प्राचीनता और खूबसूरती से लोगों को प्रभावित किया है। यह धरती हमेशा से ही विदेशी टूरिस्टों को आकर्षित करती रही है। यहां के किले वर्ल्ड फेमस हैं, जिनकी महत्वता ने उनका नाम इतिहास में दर्ज करा दिया।

Vijayrampatrika.com ‘किले राजस्थान के’ सीरीज के तहत आज आपकाे बता रहा है, चित्तौड़गढ़ के दुर्ग के बारे में।

वर्ल्ड हैरिटेज डे स्पेशल
भारत सहित दुनियाभर में 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस मनता है। यह दिन विश्व संपदा के संरक्षण और उनसे जुडे़ केयरटेकर्स को प्रोत्साहित करने के लिए सेलिब्रेट किया जाता है। सालभर में यूनेस्को लोगों के बीच पॉपुलर हो रही जगहों को एक लिस्ट में शामिल करती है, जिन्हें वर्ल्ड हैरिटेज साइट कहा जाता है। इसके तहत उन साइट्स की सुरक्षा-संरक्षा पुख्ता करने पर जोर रहता है। अपने देश से भी कर्इ धरोहर वर्ल्ड हैरिटेज का दर्जा पा चुकी हैं और आगे भी ऐसी कोशिशें होती रहेंगी। वर्ष 2013 में विश्व धरोहर समिति के 37 वें सत्र के दौरान राजस्थान के पांच किलों को विश्व विरासत स्थल घोषित किया गया था। उन्हीं में से एक है चित्तौगढ़ फोर्ट : –

भारत का सबसे लंबा किला:
Chittorgarh Fort & gaumukh reservoir
लगभग 700 एकड़ में फैले और 500 फुट की ऊंचाई वाली पहाड़ी पर स्थित इस किले की बनावट बहुत ही शानदार है। यही वजह है कि इसे भारत का सबसे लंबा किला भी कहा जाता है। इतना ही नहीं, दुर्ग फोर्ट पहुंचना भी किसी सुखद यात्रा से कम नहीं है। एक खड़े और घुमावदार मार्ग से होकर जाना आनंद की अनुभूति कराता है। इस किले में सात दरवाजे हैं, जिनके नाम हिंदू देवताओं के नाम पर पड़े हैं। इनके नाम हैं पैदल पोल, भैरव पोल, हनुमान पोल, गणेश पोल, जोली पोल, लक्ष्मण पोल और अंत में राम पोल।

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क्रिसमस संग न्यू ईयर पार्टी के लिए बेस्ट हैं इंडिया के ये 5DESTINATION

Christmas Celebration With New Year Is Fantastic Idea So Plan These 5 Indian Destination For Party.》WORLD TOURISM Desk: क्रिस्मस का फेस्टिवल न्यू ईयर के बहुत ही करीब होता है जिसके चलते अधिकतर लोग कोशिश करते हैं किसी ऐसी जगह सेलिब्रेट करने की जिससे एक साथ दोनों काम हो जाए। तो अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं तो प्लान बनाएं ऐसी जगहों का, जहां शांति और सुकून के साथ क्रिसमस और न्यू ईयर को एन्जॉय किया जा सकता है।

List of Top 5 Best & Famous Churches in India
इंडिया में इसके लिए वैसे तो बहुतेरे डेस्टिनेशन्स हैं, लेकिन उनमें से 5 तो इन्हीं दो इच्छाओं को पूरा करने के लिए। जैसे कि गोवा के बीच और उत्तराखंड में हिल स्टेशन नियर चर्च। यहां शांत से चर्च में जाकर प्रार्थना करने और उसके बाद वहां के नजारों का मजा लेने के लिए बेस्ट हैं ये सारी जगहें। ये चर्च इतने खूबसूरत हैं कि इन्हें देखकर यूरोपियन चर्चों का अहसास होता है।

1. सेंट जॉन चर्च, नैनीताल
St. John Church Nainital
सेंट जॉन चर्च इन वाइल्डरनेस, एक शांत जगह है जो मल्लीताल (नैनीताल के उत्तरी छोर) में स्थित है। इस चर्च को जंगल में सेंट जॉन के रूप में भी जाना जाता है। यह चर्च 1880 के भूस्खलन में शिकार हुए लोगों के एक स्मारक के रूप में भी कार्य करता है, जहां एक पीतल की पट्टिका में शिकार हुए लोगों का नाम लिखा हुआ है। नैनीताल भली-भांति देश के विभिन्न भागों से सड़क, रेल और वायु मार्ग से जुड़ा हुआ है।

क्रिसमस एंड न्यू ईयर सेलिब्रेशन के लिए फेमस अन्य डेस्टिनेशंस के लिए छुएं फोटोज, अंदर स्लाइड्स में पढें....
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अद्भुत है इस झरने का आकर्षण, कभी गौतम बुद्ध ने किया था यहां स्नान

Jharkhand Tourism: Jonha Falls,Ranchi Complete Tour ...》दुनियां 360° news Desk: झारखंड की राजधानी रांची को झरनों का शहर भी कहते हैं। यहां कई झरने हैं। इनमें से एक है जोन्हा। इसे गौतमधारा के नाम से भी जाना जाता है। गर्मियों के दिनों में तो यह लगभग सूख जाता है लेकिन बरसात के समय इसकी खूबसूरती देखते ही बनती है। इन दिनों भी इसके आकर्षक रूप को देखने के लिए पर्यटकों की भीड़ उमड़ रही है। साथ ही नए साल में तो मेला सा माहौल हो जाता है। पिकनिक स्पॉट के रूप में इसे बेहद पसंद किया जाता है।

15 नवंबर को राज्य का स्थापना दिवस है। इस मौके पर Vijayrampatrika.com आपको दिखाएगा ‘झारखंड की खूबसूरती’। आज हम बता रहे हैं रांची स्थित एक ऐसे झरने के बारे में जो गौतम बुद्ध से जुड़ा हुआ है…

गौतम बुद्ध ने किया था स्नान इसलिए कहते हैं गौतमधारा भी
Jharkhand Tourism: Jonha Falls & Gautamdhara
इस फॉल का नाम पास के एक गांव पर पड़ा है। जोन्हा फॉल को गौतम धारा के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि गौतम बुद्ध ने यहां स्नान किया था। गौतमधारा के एक छोर पर बुद्ध को समर्पित एक मंदिर और एक आश्रम है, जिसे राजा बालदेवदास बिरला के बेटों ने बनवाया था।

लगता है मेला
हर मंगलवार और गुरुवार को यहां लगने वाला मेला भी पर्यटकों के बीच काफी चर्चित है। गर्मी के दिनों में यह सूख जाता है और जैसे ही बरसात शुरू होती है, झरना फिर बहने लगता है। अब दिए गए फोटोज़ को छुएं और झरने के खासियतों के बारे में अंदर स्लाइड्स में पढें...

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