》BHARAT

Vijayrampatrika
› National reports, India’s knowledge, our military strength and you will get good news click on Section. Here you can see about the Union budget, train budget and central schemes.

भारत के सबसे बडे़ इस किले में हैं फूल और शीश महल, कर देते हैं मंत्रमुग्ध

the old blue city of Jodhpur shot from the Mehrangarh》WORLD TOURISM Desk: इंडिया पुराने किलों और स्मारकों के लिए फेमस है। यहां के किले हमारे गौरवशाली इतिहास की गाथओं के बारे में बताते हैं। यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज में चित्तौड़गढ़ फोर्ट सहित राजस्थान के पांच किले शामिल हैं। इनमें मेहरानगढ़ फोर्ट अपनी ऊंचार्इ और खूबसूरत कारीगरी का शानदार अट्रैक्शन है। इसके आज भी खूब बने रहने और उस दौर में राजा की रानियों के मरने की कहानी बडी़ निराली है।

Vijayrampatrika.com आपको आज़ ले चल रहा है इस किले के भ्रमण पर…

पांच सौ साल से अधिक पुराना मेहरानगढ़
MEHRANGARH FORT – JODHPUR, PHOTOS, HISTORY
राजस्थान के जोधपुर शहर में 120 मीटर से भी ऊंची पहाडी़ पर स्थित है मेहरानगढ़ किला। यह 500 साल से भी ज़्यादा पुराना और सबसे बड़ा किला है। इसे राव जोधा द्वारा बनवाया गया था। इस किले में सात गेट हैं। प्रत्येक गेट राजा के किसी युद्ध में जीतने पर स्मारक के रूप में बनवाया गया था। इस किले में जायापॉल गेट राजा मानसिंह ने बनवाया था। किले के अंदर मोती महल, शीश महल जैसे भवनों को बहुत ही ख़ूबसूरती से सजाया गया है। चामुंडा देवी का मंदिर और म्यूज़ियम इस किले के अंदर ही हैं। इस किले का म्यूज़ियम राजस्थान का सबसे अच्छा म्यूज़ियम माना जाता है।
वैसे भी, राजस्थान को रॉयल पैलेस कई कारणों से कहा जाता है। यह टूरिस्ट्स को सबसे ज़्यादा आकर्षित करने वाला राज्य है। राजस्थान अपने किलों के अलावा थार रेगिस्तान, खूबसूरत झीलें, नेशनल पार्क और एक रॉयल लाइफ स्टाइल के लिए भी फेसम है। राजस्थान के सभी किलों के बारे में जानने के लिए यहां क्लिक करें

फोटोज़ छुएं और अंदर स्लाइड्स में पढें: क्यों बनाया गया ऐसा किला, पाक से हुआ युद्घ?
कैसे हैं मोती महल, फूल महल, शीश महल, सिलेह खाना, दौलत खाना और रंगमहल
पहाडों पर 36KM दीवार से घिरा है ये किला, INDIA के 10 खूबसूरत FORTS
इस किले से रुष्ठ थे मुगल बादशाह, हिंदु रानियां से करते थे हरम का शौक पूरा !

Advertisements
Categories: 》BHARAT | Tags: | Leave a comment

इन विमानों के बल पर पाक-चीन से हैट नहीं खाती भारतीय वायुसेना

इन विमानों के बल पर दुनिया में सातवें स्थान पर है भारतीय वायुसेना》दुनियां 360° Desk: युद्ध भले ही जमीन पर लड़े जाएं, लेकिन जीत और हार का फैसला हवाई ताकत से तय होता है। ईराक और सीरिया पर अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों द्वारा किए गए हमले में यह बात एक बार फिर सही साबित हुर्इ। यही कारण है कि दुनिया के सभी देश अपनी वायुसेना को अत्याधुनिक विमानों, मिसाइलों और अन्य साजो-सामान से लैस करना चाहते हैं।

Indian airforce day spcl
8 अक्टूबर को हिंदुस्तान में एयरफोर्स डे मनाया जाता है। इस मौके पर हर साल Vijayrampatrika.com आपके लिए लाता है भारतीय वायुसेना से जुडी़ महत्वपूर्ण जानकारियां। इस बार पढें हमारे बेडे़ में तैनात सबसे ताकतवर लड़ाकू विमानों के बारे में।

विश्व में 7वीं सबसे दमदार IAF
Jet fighters and bombers of Indian Air Force
संख्या के लिहाज़ से भारतीय थल सेना दुनिया में दूसरी सबसे बडी़ है जबकि डेढ़ लाख से अधिक हवार्इबल के साथ वायुसेना सातवीं। हमारे सुखोई, मिग-29 और मिग-27, मिराज-2000, जगुआर और हरक्युलिस जैसे विमानों से दुश्मन खौफ खाते हैं। स्वंय की सुरक्षा की चिंता करें तो आजादी के बाद से ही भारत को पडौ़सी देश पाकिस्तान और चीन से खतरा रहा है। यही कारण है कि एयरफोर्स ने सुखोर्इ जेट्स को जोधपुर, सिरसा और हलवारा में तैनात किया।

अब दिए गए चित्रों पर क्लिक कर अंदर स्लाइड्स में जानें, अपने प्रमुख फाइटर प्लेन्स को…
यह भी पढें: ये हैं दुनिया की दस सबसे ताकतवर वायुसेनाएं, अमेरिका टॉप पर
2022 तक ऐसी हो जाएगी हमारी एयरफोर्स, 2020 में शामिल होंगे ये हथियार
ये हैं दुनिया के 10 मॉडर्न और सबसे खतरनाक लड़ाकू विमान, अभी देखें इन्हें

Categories: 》BHARAT | Tags: | Leave a comment

ये फाइटर प्लेन पांच मिनट में गिरा सकता है पाकिस्तान के लाहौर पर बम

सुपरसोनिक लड़ाकू विमान सुखोई-30Vijayrampatrika.com आपको समय-समय पर देश-दुनिया की सैन्य ताकत पर अपडेट देता रहा है। किस देश ने मिलट्री फील्ड में क्या बदलाव किए हैं, उनकी ताकत क्या है आदि सवालों के जवाब आप यहां देख सकते हैं।

इंडियन एयर फोर्स
अब आगामी आठ अक्टूबर को ‘इंडियन एयर फोर्स डे’ है। इस मौके पर हम एक विशेष सीरीज के तहत बता रहे हैं भारतीय वायुसेना की रोचक बातें। भारतीय वायुसेना की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को ब्रिटिश शासन काल में की गई थी, तब इसे ‘रॉयल इंडियन एयर फोर्स’ कहा जाता था।

Sukhoi Su-30MKI
आजादी के बाद से भारतीय वायुसेना ने कई मुकाम हासिल किए हैं। रूस से सुखोई विमान मिलने के बाद इसकी ताकत कई गुना बढ़ गई। जोधपुर एयरबेस पर सुपरसोनिक लड़ाकू विमान सुखोई-30 के स्क्वाड्रन की तैनाती से पाकिस्तान के कई शहर इसकी जद में आ गए हैं। सुखोई-30 जोधपुर एयरबेस से 2450 किमी/घंटे की रफ्तार से पांच मिनट में लाहौर पहुंच सकता है।

वायुसेना की सक्रियात्मक क्षमता बढ़ेगी :
सुखोई के जोधपुर एयरबेस पर तैनाती से वायुसेना की सक्रियता काफी बढ़ गई है। पाकिस्तान से सटी राजस्थान, पंजाब, गुजरात व जम्मू-कश्मीर तक की सीमा पर हवाई सुरक्षा मजबूत हुई है। दिए गए फोटोज़ पर क्लिक करके जानें सुखोर्इ 30MKI के बारे में,
जो युद्घ की स्थिति में लाहौर को ध्वस्त करने में कुछ वक्त ही लगने देगा, फिलहाल भारतीय वैज्ञानिक इसमें सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस फिट करने पर काम कर रहे हैं…

Categories: 》BHARAT | Tags: | Leave a comment

आजाद हिंदुस्तान की सबसे बड़ी शवयात्रा थी ये, 10 लाख लोग चल रहे थे साथ

 आजाद भारत की सबसे बड़ी शवयात्रा थी ये, दस लाख लोग चल रहे थे साथ》India news Desk: इसे आजाद भारत की सबसे बड़ी शवयात्रा कहा गया था। मौत के बाद राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अंतिम संस्कार 31 जनवरी 1948 को दिल्ली में यमुना किनारे हुआ था। जबकि उनकी अस्थियां मध्यप्रदेश की ताप्ती नदी में विसर्जित की गर्इ थीं। गांधीजी के छोटे बेटे ने एक इंटरव्यू में बताया था कि करीब दस लाख लोग साथ चल रहे थे और करीब 15 लाख लोग रास्ते में खड़े थे।

2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती है। Vijayrampatrika.com इस मौके एक विशेष सीरीज के तहत बताने जा रहा है उनके जीवन से जुड़ी कुछ कही और अनकही बातें। इसी कड़ी में बता रहे हैं गांधीजी के अंतिम संस्कार के बारे में।

अर्थी पर डाला गया था तिरंगा
गांधीजी की हत्या की खबर जैसे ही लोगों को मालूम चली, बिड़ला हाउस के सामने लोगों की भीड़ उमड़ने लगी। लोग नारे लगाते हुए गांधीजी के दर्शन की मांग करने लगे। शव को रात को ही किसी तरह बिड़ला हाउस की छत पर रख दिया गया और उस पर रोशनी डाली गई, जिससे लोग बापू के अंतिम दर्शन कर लें। 31 जनवरी की सुबह एक बार फिर ऐसा ही किया गया। गांधीजी के तीसरे बेटे रामदास 11 बजे हवाई जहाज से नागपुर से दिल्ली आए। उनके आने के थोड़ी ही देर बाद अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू हो गई। सभी धार्मिक कर्म के बाद अर्थी पर तिरंगा झंडा डाल दिया गया था।

रात में तैयार कर दिया था वाहन
15-हंडरवेट सैनिक हथियार-गाड़ी के फ्रेम पर एक नया ढांचा खड़ा कर दिया गया था, ताकि खुली अर्थी पर रखा हुआ शव सभी को दिख सके। शवयात्रा जैसे ही शुरू हुई लोग चीख-चीख कर रोने लगे। देश की तीनों सेनाओं के दो सौ जवान चार मोटे रस्सों से गाड़ी को खींच रहे थे। एक छोटा सैनिक अफसर मोटर के चक्के पर बैठा। नेहरू, पटेल, कुछ अन्य नेता तथा गांधीजी के कुछ युवा साथी इस वाहन पर सवार थे। शवयात्रा के संचालक मेजर जनरल राय बूचर थे। यह अंग्रेज थे, जिन्हें भारत सरकार ने आजादी के बाद अपनी सेना का प्रथम प्रधान सेनापति नियुक्त किया था।

दिए गए फोटोज छुएं और अंदर स्लाइड्स में पढ़ें पूरी खबर…

Categories: 》BHARAT | Tags: | Leave a comment

यहां से आया था गांधीजी की जिंदगी में बदलाव, शादी में जाना कर दिया था बंद

Manas: History and Politics, Mahatma GandhiMahatma gandhi’s life event
2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्मदिन है। इस मौके Vijayrampatrika.com गांधी जी के जीवन से जुडी़ रोचक बातों और उनके विचारों से आपको अवगत कराएगा।

इस कडी़ में आज पढे़ं उस एक घटना के बारे में जो गांधीजी के जीवन में एक अहम पड़ाव साबित हुई। इस घटना के बाद गांधीजी ने किसी भी उस तरह के कार्यक्रम में जाना बंद कर दिया था जिसमें दलित व हरिजन को नहीं बुलाया गया हो।

चम्पारन में संबोधन के बाद से बदल गए गांधी
गांधीजी की विचार-शैली में दक्षिण अफ्रीका में आए परिवर्तन के ही समान परिवर्तन उस समय आया जब बिहार के किसान राजकुमार शुक्ला ने उन्हें बिहार आमंत्रित किया और उन्होंने चम्पारन में आंदोलन किया। इसी बिहार यात्रा में उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के साथ कुरीतियों और अंधविश्वासों के उन्मूलन को शामिल करके अपने नज़रिये में समस्त मानवता के दुख को सम्मिलित किया। गांधीजी का विश्वास था कि राजनीतिक स्वतंत्रता मात्र से कुछ नहीं होगा, सामाजिक और आर्थिक स्वतंत्रता ही मानवता की रीढ़ की हड्‌डी है।

बताया जाता है कि चम्पारन में गांधीजी किसी उत्सव में गए थे वहां इस वर्ग के जाने की मनाही थी। गांधीजी को यह अच्छा नहीं लगा। इसके बाद गांधीजी ने बिहार के चम्पारन आंदोलन के बाद ही यह निर्णय लिया कि वे शादी या किसी उत्सव के ऐसे आयोजन में नहीं जाएंगे, जिसमें दलित व हरिजन आमंत्रित नहीं किए जाएंगे। अत: गांधीजी की विचार-शैली में जितने महत्वपूर्ण परिवर्तन उनके दक्षिण अफ्रीका में सत्य के प्रयोग के साथ आए उतने ही महत्वपूर्ण बिहार यात्रा व चम्पारन आंदोलन के समय आए। गांधीजी का प्रभाव जीवन के हर क्षेत्र में पड़ा।

दिए गए फोटोज़ छुएं और अंदर स्लाइड्स में पढें गांधी जी ने कभी क्यों नहीं पहनी टोपी, नहीं देखी कोर्इ फिल्म और कैसा रहा पत्रकारिता पर उनका प्रभाव…...

Categories: 》BHARAT | Tags: | Leave a comment

Create a free website or blog at WordPress.com.

%d bloggers like this: