ये हैं 10 प्रसिद्ध हनुमान मंदिर, हर एक की है अपनी खास विशेषता

हनुमान जी के दस प्रसिद्ध मंदिर》जीवन दर्शन Desk: देश में हनुमान जी के लाखों मंदिर हैं। उनमें सबकी मान्यताएं और खास विशेषताएं हैं। कोर्इ मंदिर रामायणकाल से ही मौजूद है, तो किसी में हनुमानजी की आश्चर्यकारी प्रतिमाएं स्थापित हैं। कहीं वह पुत्र के साथ विराजमान हैं तो कहीं लेटी हुर्इ अवस्था में हैं। यहां किसी मंदिर में बजरंग बली की मूंंछें हैं, तो कहीं हाथ में उनकी गदा नहीं हैं।

Vijayrampatrika.com यहां आपको ले चल रहा है भगवान महावीर के कुछ प्रसिद्घ मंदिरों के दर्शन कराने, जिनकी अपनी-अपनी विशेषताएं हैं। वे परिसर सालों से उसी स्थान पर स्थापित हैं, जहां सदियों से भक्तों का तांता लगता रहा है…..

1. हनुमानगढ़ी, अयोध्या
भगवान श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या में सबसे प्रमुख श्रीहनुमान मंदिर ‘हनुमानगढ़ी’ के नाम से प्रसिद्ध है। यह मंदिर राजद्वार के सामने ऊंचे टीले पर स्थित है। इसमें 60 सीढिय़ां चढऩे के बाद श्रीहनुमानजी का मंदिर आता है। यह मंदिर काफी बड़ा है। मंदिर के चारों ओर निवास योग्य स्थान बने हैं, जिनमें साधु-संत रहते हैं। हनुमानगढ़ी के दक्षिण में सुग्रीव टीला व अंगद टीला नामक स्थान हैं। यहां गर्भगृह काफी पुराना है। जबकि मंदिर की स्थापना लगभग 300 साल पहले स्वामी श्रीअभयारामदासजी ने करार्इ थी।

2. श्री संकटमोचन मंदिर
वाराणसी (बनारस) का यह मंदिर छोटे से वन के बीच स्थित है। जिससे यहां का वातावरण एकांत, शांत एवं उपासकों के लिए दिव्य साधना स्थली के योग्य है। हनुमान जयंती पर स्थानीय निवासियों में यहां काफी हर्षोल्लास दिखता है। मंदिर के प्रांगण में बजरंग बली की दिव्य प्रतिमा है, जिसके समीप ही भगवान श्रीनृसिंह का देवालय भी स्थापित किया गया है। ऐसा कहा जाता है कि यह प्रतिमा (मूर्ति) गोस्वामी तुलसीदासजी के तप एवं पुण्य से प्रकट हुई थी। यानी यहां स्वयंभू प्रतिमा है।

3. प्रयाग के हनुमान मंदिर
यूपी में इलाहाबाद (प्रयाग) में एक किले के निकट हनुमान जी का प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर में श्रीहनुमान लेटे हुए अवस्था में हैंं। यह देश में अपनी तरह की एकलौती ऐसी प्रतिमा है। मुख्य प्रतिमा करीब 20 फीट की है। कहा जाता है कि बारिश के दौरान यहां जलस्तर काफी ज्यादा बढ़ जाता है, इससे मंदिर भी जलमग्न हो जाता है। लोग इसे किसी अनहोनी का संकेत समझते हैं और सावधान हो जाते हैं।

4. सालासर बालाजी, राजस्थान
चुरू जिले में हनुमान जी का यह मंदिर दूर-दूर तक विख्यात है। यह एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां उनकी प्रतिमा के दाढी़-मूंछ हैं। दूर-दूर से आए श्रद्घालुओं को ठहराने के लिए मंदिर के चारों ओर धर्मशालाएं स्थित हैं। ऊपरी चक्कर से मात खाए पीडितों का इलाज किया जाता है। मंदिर की स्थापना के बारे में कहा जाता है कि एक बार मोहनदासजी ने (जो कि बजरंग बली के अटूट भक्त थे) एक किसान की जमीन से यह प्रतिमा प्राप्त की थी। जिसे इन्होंने सोने के सिंहासन पर विराजमान किया। सालासर गांव में हर साल भाद्रपद, आश्विन, चैत्र एवं वैशाख की पूर्णिमा के दिन मेला लगता है।

5.हनुमान धारा, चित्रकूट
यूपी में सीतापुर से करीब 6 किमी दूर पर्वतमाला के मध्यभाग में है हनुमानधारा। यह मंदिर हरेभरे पहाडों पर बड़ा मनमोहक लगता है। मन्दिर के जस्ट दो जल कुंड हैं, जिनमें हमेशा ताजा जल प्रवाहित होता रहता है। पहाडी़ से पानी का बहाव धीमे-धीमे होता है, जबकि बारिश के दौरान हनुमान जी की प्रतिमा को स्पर्श करता है। यह बहाव ही आगे चलकर पातालगंगा (प्रभाती) नदी में विलय हो जाता है।
यह है मान्यता
भगवान श्रीराम के अयोध्या में राज्याभिषेक होने के बाद एक दिन हनुमानजी ने उनसे कहा – हे भगवन ! मुझे कोई ऐसा स्थान बतलाइए, जहां लंका दहन से उत्पन्न मेरे शरीर का ताप मिट सके। तब श्रीराम ने चित्रकूट का यह स्थान हनुमानजी को बताया था।

6. डुल्या मारुति, पूना
महाराष्ट्र में गणेशपेठ में स्थित यह मंदिर काफी पुराना है। इसे श्रीडुल्या मारुति का मंदिर कहते हैं, चूंकि यहां प्रतिमा एक काले पत्थर पर अंकित है। 5 फीट ऊंची, 3 फीट चौड़ी इस प्रतिमा का मुख पश्चिम की ओर है। भगवान गणेश भी पास में ही विराजित हैं। मंदिर परिसर, सभा मंडप द्वार के ठीक सामने एक पीतल का घंटा लटका हुआ है, जिस पर संवत् 17,00 अंकित है। मंदिर का निर्माण श्रीसमर्थ रामदास स्वामी ने कराया था।

7. उल्टी प्रतिमा वाला मंदिर
मध्य प्रदेश के सांवरे (इंदौर) में उज्जैन से करीब 30 किलोमीटर दूर हनुमानजी का एक ऐसा मंदिर है, जहां वे उल्टे रूप में पूजे जाते हैं। प्रतिमा का मुख उल्टा है, जिस पर सिंदूर लगा है। मान्यताओं के अनुसार, रामायण काल में जब अहिरावण की खोज करते हुए हनुमान पाताल लोक गए थे तो धरती से उल्टे होकर प्रवेश किया था। तब से यहां किवदंतियां रही हैं और मंदिर भी बनाया गया।

8. मेहंदीपुर बालाजी
राजस्थान में दौसा जिले के मेंहदीपुर स्थान पर बना यह मंदिर करीब 1 हजार वर्ष पुराना है। यह मंदिर जयपुर-बांदीकुर्इ बस मार्ग पर जयपुर से करीब 66 किमी दूर दो पहाडियों के बीच घाटी में स्थित है। भूत-प्रेत से पीडित लोगों का यहां बेहतर तरीके से किया जाता है। यहां आते ही पीडितों को अजीब सा-महसूस होता है, वे झूमने लगते हैं। मान्यताओं के अनुसार, विशाल चट्टान पर वीर हनुमान की आकृति स्वंय उभरी थी। जिनके चरणों में स्थित एक कुंडी का जल कभी समाप्त नहीं होता, जबकि वह पहाडियों पर ऊपर स्थित है। मंदिर के चमत्कारों को धता बताते हुए मुगलों ने अपने शासनकाल के दौरान कर्इ बार इसे नष्ट करने की कोशिश, लेकिन कामयाब नहीं हो सके।

9. हनुमंत द्वार, ब्रज
मथुरा के गोवर्धन परिक्रमा मार्ग में वीर हनुमान के कर्इ मंदिर हैं। जिनमें एक मंदिर की प्रतिमा काफी बडी़ है, यह कर्इ किलोमीटर से नजर आती है। पहाडियों में पेडों के झुरमुट के बीच भी हनुमान जी के मंदिर की शोभा देखने लायक है। कहा जाता है कि गोवर्धन उसी पर्वत का हिस्सा है, जिसे त्रेता में वीर हनुमान लक्ष्मण की मूर्छा दूर करने के लिए द्रोणपर्वत से लाए थे। गुरू पूर्णिमा पर यहां विश्व-प्रसिद्घ मेला लगता है, इस दौरान प्रतिमा पर रंग-बिरंगी लाइटिंग और गैलरी नजर आती हैं। गिरिराज परिक्रमा हेतु करीब 4 करोड़ लोग हर साल आते हैं।

10. पुत्र के साथ विराजित हनुमान
गुजरात में बेट द्वारिका से करीब 4 मील की दूरी पर हनुमान दंडी मंदिर है। इस मंदिर में वीर हनुमान के साथ मकरध्वज की भी प्रतिमा स्थापित है। मान्यताओं के अनुसार, मकरध्वज का जन्म एक मछली के गर्भ से हुआ था। लंका दहन के दौरान जब हनुमान समुद्र में आग भुजाने के लिए घुसे तो उनके पसीने उसमें टपक गए। वह पसीना मछली के मुंह में चला गया था। बेट द्वारिका मंदिर के अलावा गुजरात में जाननगर स्थित बालहनुमान का मंदिर भी बड़ा प्रसिद्घ है। इस मंदिर को गिनीज बुक ऑफ द वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया जा चुका है।

हनुमान जी की अन्य मंदिरों के बारे में जानने के लिए यहां क्लिक करें

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