गोलघर में अनाज भंडारण करते थे अंग्रेज, ये हैं पटना की 12 ऐतिहासिक जगहें

India Tourism Videoवर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) की रिपोर्ट में भारत के पटना को दुनिया का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर बताया गया है। यहां वार्षिक औसत पाल्युशन अमाउंट (PM2.5, ug/m3: 149) बहुत अधिक है। लेकिन आपको बता दें कि आज़ भले ही स्थिति इतनी विकट हों पर ऐतिहासिक धरोहरों के नजरिए से पटना पॉजीटिव है।

Vijayrampatrika.com यहां आपको बताने जा रहा है पटना की उन ऐतिहासिक धरोहरों के बारे में जो अपने आप में खास हैं। हैरिटेज-टूर लवर्स अक्सर वहां जान पसंद करेंगे।

1. गोलघर : बगैर पिलर के अब तक खड़ा
पटना में 1770 में आए भयंकर सूखे के बाद कैप्टन जॉन गार्स्टिन ने 1786 में इसे बनवाया था। इसमें ब्रिटिश फौज के लिए अनाज का भंडारण किया जाता था। 96 फीट ऊंचे इस गोलघर में कहीं कोई भी खंबा नहीं है और यही इसकी खूबी है। इस पर ऊपर चढ़ने के लिए सर्पिलाकार सीढियां है। कहा जाता है कि मजदूर एक तरफ से अनाज के बोरे लेकर चढ़ते थे और ऊपर से खाली जगह से उन्हें नीचे गिराकर दूसरी तरफ से उतर जाते थे। इसमें एक साथ एक लाख 40 हजार टन अनाज रखा जा सकता है। तो ये है गोलघर, काफी लागत में इसे बनाया गया था।

2. कुम्रहार: यहां पर हैं पटना के इतिहास के सबूत
चंद्रगुप्त मौर्य, बिन्दुसार तथा अशोक कालीन पाटलिपुत्र के भग्नावशेष को देखने के लिए यह सबसे अच्छी जगह है। कुम्रहार परिसर की देखरेख का जिम्मा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के हाथों में है। पाटलिपुत्र के अवशेष आपको यहीं देखने को मिलेंगे। तस्वीर में मौयकाल का एक स्तंभ। यह सोमवार को छोड़ हर दिन खुला रहता है।

दिए गए फोटोज़ को छुएं और अंदर स्लाइड्स में जानें पटना की ऐतिहासिक महत्व वाली बाकी जगहें....

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