स्वर्ग का द्वार कही जाती है ये गुफा, लग रहा जैसे शिव की जटाओं में गंगा

ये एकमात्र ऐसा स्थान है जहां पर चारों धामों के दर्शन एक साथ होते हैं। 》जीवन दर्शन Desk: हिमालय की पहाडियों में पिथौरागढ़ को अपने प्राकृतिक आकर्षण के लिए जाना जाता है। गहरी गुफाएं, बर्फीली ठेकें और पर्वतों पर हरियाली के कारण इसे ”छोटा कश्मीर” निकनेम मिला है। यहां चारों धामों के दर्शन कर लेने की किवदंतियां भी रही हैं। समुद्र तल से हजारों फीट ऊंचार्इ पर और हिमालय में गहरार्इ तक मौजूद ‘पाताल भुवनेश्वर’ यहां ऐसा ही एक तीर्थ है।

Vijayrampatrika.wordpress.com आज आपको ले रहा है पाताल भुवनेश्वर में प्राचीन अमृतकुंड के दर्शन के कराने, जहां के बारे में मान्यता है कि ये स्वर्ग का द्वार है, हिम में भोले की प्रतिकृति से गंगा निकलती है…..

कहां है पाताल भुवनेश्वर?
About facts of Patal Bhuvaneshwar
दरअसल यह एक प्राचीन गुफा है, जो हिमालय की गोद में कर्इ रहस्य समेटे हुए है। यहां करीब 90 फीट अंदर तक दर्शन किए जाते हैं, जिसके लिए चट्टानों के बीच संकरी व टेढी-मेढी़ गलियों से उतरना पड़ता है। कहीं-कहीं यह इतनी पतली है, मानो जैसे आप ढलान से नीचे नहीं जा सकते। लेकिन फिर भी मन में आस्था लिए आपके पैर आसानी से राह बनाते चले जाएंगे।

क्या है पाताल भुवनेश्वर के अंदर?
Patal Bhuvaneshwar is a limestone cave temple 14 km from Gangolihat in the Pithoragarh district of Uttarakhand state in India. It is located in the village of Pithoragarh. See more at: Vijayrampatrika.comगुफा में अंदर पहुंचने पर सबसे पहले आपको अलग अनुभूति का अहसास होगा, फिर प्रतिमाएं दिखेंगी। इन प्रतिमाओं को देखकर जिज्ञासु होना स्वाभाविक है, शेषनाग, जो फन पर धरती को उठाए बैठे हैं। यहां विशालकाय चट्टान है, जिसके बारे में मान्यता है कि इसी जगह शेषनाग ने पृथ्वी को अपने मस्तिष्क पर धारण किया था। इसके पश्चात् यहां गणेशजी की प्राकृतिक प्रतिमा के दर्शन किए जाते हैं। गणेश जी प्रतिकृति पर ब्रह्म कमल से अमृत की बूंदे गिरती प्रतीत होती हैं। पवित्र धाम – केदारनाथ, बद्रीनाथ, अमरनाथ धाम और कालभैरव स्थली को भी यहां देख जा सकता है।

इसे कहते हैं ‘स्वर्ग का द्वार’
स्कंद पुराण, मानस खंड के 103वें अध्याय में ‘पाताल भुवनेश्वर’ का प्रसंग है, इसमें बताया गया है कि यह जगह कलयुग के अंत से जुडे संकेत देगी। पहाडी़ में गुफा के अंदर ही भगवाऩ शिव की आकृति उभरी हुर्इ है तो एक कुंड भी उफान पर रहता है। इसे अमृतकुंड कहते हैं, अंधेरे में और गहरार्इ तक कर्इ गलियां जाती हैं, जिनमें आगे बढ़ना मुश्किल है। देवराज इंद्र का वाहन ऐरावत हाथी ‘पाताल भुवनेश्चर’ में अंदर ही है, जहां से ‘स्वर्ग का द्वार’ बतलाया जाता है। इसी जगह शिव गंगा को जटाओं में धारण किए हुए प्रतीत होते हैं। उत्तराखंड में पर्वतों और गुफाओं में अप्रितम सीढियों का अहसास भी होता है।

दिए गए फोटो छुएं और अंदर स्लाइड्स में पढें कुछ रोचक लाइंस……..
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