बड़े – बड़े शहंशाह भी न भेद पाए इस किले को, अंग्रेजों ने कहा था दूसरा जिब्राल्टर

Taragarh fort in Bundi is a glorious portrayal of Rajasthani architecture#Vijayrampatrika.Com 》WORLD TOURISM Desk. आक्रमण, सुरक्षा और स्थापत्य का अद्भुत नमूना है अजमेर फोर्ट। इस शहर में जाने पर ऐसा लगता है मानो तारागढ़ हमें बुला रहा है। यह अपने गौरवशाली इतिहास के लिए फेमस है। अजमेर की सबसे ऊंची पर्वत शृंखला पर स्थित तारागढ़ दुर्ग को सन् 1832 में भारत के गवर्नर जनरल विलियम बैंटिक ने देखा तो उनके मुंह से निकल पड़ा- ‘ओह दुनिया का दूसरा जिब्राल्टर’ और मुगल बादशाह अकबर ने तो इसकी श्रेष्ठता भांप कर अजमेर को अपने साम्राज्य का सबसे बड़ा सूबा बनाया था। तारागढ़ जिसके भी अधीन रहा, वह दुर्ग के द्वार पर कभी लड़ाई नहीं हारा।

यह फोर्ट 1,885 फीट ऊंचे पर्वत शिखर पर दो वर्ग मील में फैला हुआ है। यह ऊंचाई इतनी ज्यादा है कि दूर-दूर से इस किले का दीदार किया जा सकता है। इसकी बनावट को देख बेहद सुखद अनुभव होता है। इसके चारो तरफ देखें तो एक ओर गहरी घाटी, दूसरी ओर लगातार तीन पर्वत शृंखलाएं, तीसरी ओर सीधी ढलान और चौथी ओर अजमेर शहर का विहंगम दृश्य देखते ही बनता है।

यहां हम आपको बताने जा रहे हैं किले की तमाम खासियतों के बारे में जिनके कारण कोई भी इसे भेद न पाया। दी गर्इ तस्वीरें छुएं और एक-एक पर क्लिक करके अंदर पढें …

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