ताजमहल के लिए शाहजहां ने त्याग दिए थे शौक, मजदूरों को दिए थे 5 गुना पैसे

taj mahal storyदुनिया के सात अजूबों में से एक ताजमहल को बनाने में सिर्फ सिविल इंजीनियरिंग ही नहीं, बल्कि शाहजहां के जुनून का भी बहुत बड़ा हाथ था। जानकारों का मानना है कि ताजमहल बनाने के जुनून में शाहजहां ने अपने सारे शौक त्याग दिए थे।

विशेषज्ञों को 361 साल पहले शाहजहां ने दिया था 1500 रुपए महीना
शाहजहां और मुमताज महल की दास्तां पर नजर डालें तो पता चलता है कि किस तरह बीस हजार मजदूरों की मदद से 22 सालों में यह अजूबा बनकर तैयार हुआ। ताजमहल बनाने के लिए जिन विशेषज्ञों को पर्शिया से बुलाया गया उन्हें आज से लगभग 361 साल पहले पंद्रह सौ रुपए प्रतिमाह के मासिक मेहनताने पर रखा गया जो उस समय के मेहनताने से कहीं ज्यादा था। यही नहीं मजदूरों को भी उस समय दिए जाने वाले मेहनताने से 5 गुना ज्यादा पैसे दिए थे जो उनकी मुंहमांगी कीमत के बराबर थे। यहां जानें आखिर क्यों निचले तबके के कारीगरों को भी दिया गया था पांच गुना पैसा :

कारीगरों को मिलता था पांच गुना ज्यादा पैसा
सबसे निचले तबके के कारीगरों को भी जो मेहनताना दिया जाता था वो भी औसत से पांच से दस गुना ज्यादा था। इसके पीछे शाहजहां की सोच थी कि जब कारीगरों को उनके कौशल के लिए सही दाम दिया जाता है तो वे पूरी तरह से उस काम में डूब जाते हैं और उनके जुनून का असर काम में साफ नजर आता है। फोटो क्लिक कर अंदर स्लाइड्स में जानें कितने करोड़ में बना था ताजमहल……..

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