यहां देखना न भूलें ऐसे मंदिर, जिनमें रोज होती है महावीर हनुमंत और उनके पुत्र की पूजा

b-ब्यावर temple of Hanuman and Makardhwaj_vijayrampatrika-com_01श्री हनुमान बल, पराक्रम, ऊर्जा, बुद्धि, सेवा, भक्ति के आदर्श देवता माने जाते हैं। देश में उनके लाखों मंदिर हैं, लेकिन सबकी अपनी विशेषताएं हैं। हम आपको बता रहे हैं एक ऐसे मंदिर के बारे में जहां उनकी पूजा उनके बेटे के साथ की जाती है। हालांकि इससे पहले बता दें कि हिंदू धर्म को मानने वाले ये बात बहुत अच्छी तरह से जानते हैं कि भगवान श्रीराम के परमभक्त व भगवान शंकर के ग्यारवें रुद्र अवतार श्रीहनुमानजी बालब्रह्मचारी थे लेकिन बहुत ही कम लोग ये बात जानते हैं कि धर्म शास्त्रों में हनुमानजी के एक पुत्र का वर्णन भी मिलता है।

शास्त्रों में बजरंगबली के इस पुत्र का नाम मकरध्वज बताया गया है। भारत में दो ऐसे मंदिर भी है जहां हनुमानजी की पूजा उनके पुत्र मकरध्वज के साथ की जाती है। इन मंदिरों की कई विशेषताएं हैं जो इसे खास बनाती हैं। अगर आप भी हनुमानजी के इस पुत्र की उत्पत्ति की कथा व इन मंदिरों से जुड़ी खास बातें जानना चाहते हैं तो यहां पेश है ब्यौरा –

इस तरह उत्पन्न हुए हनुमान के पुत्र
जिस समय महावीर हनुमानजी सीता की खोज में लंका पहुंचे और मेघनाद द्वारा पकड़े जाने पर उन्हें रावण के दरबार में प्रस्तुत किया गया। तब रावण ने उनकी पूंछ में आग लगवा दी और हनुमान ने जलती हुई पूंछ से पूरी लंका जला दी। जलती हुई पूंछ की वजह से हनुमानजी को तीव्र वेदना हो रही थी जिसे शांत करने के लिए वे समुद्र के जल से अपनी पूंछ की अग्नि को शांत करने पहुंचे। उस समय उनके पसीने की एक बूंद पानी में टपकी जिसे एक मछली ने पी लिया था। उसी पसीने की बूंद से वह मछली गर्भवती हो गई और उससे उसे एक पुत्र उत्पन्न हुआ, जिसका नाम पड़ा मकरध्वज। मकरध्वज भी हनुमानजी के समान ही महान पराक्रमी और तेजस्वी था उसे अहिरावण द्वारा पाताल लोक का द्वारपाल नियुक्त किया गया था।

जब अहिरावण श्रीराम और लक्ष्मण को देवी के समक्ष बलि चढ़ाने के लिए अपनी माया के बल पर पाताल ले आया था तब श्रीराम और लक्ष्मण को मुक्त कराने के लिए हनुमान पाताल लोक पहुंचे और वहां उनकी भेंट मकरध्वज से हुई। तत्पश्चात मकरध्वज ने अपनी उत्पत्ति की कथा हनुमान को सुनाई। हनुमानजी ने अहिरावण का वध कर प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण को मुक्त कराया और श्रीराम ने मकरध्वज को पाताल लोक का अधिपति नियुक्त करते हुए उसे धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। हनुमानजी के पुत्र मकरध्वज के मंदिर कहां है, ये भी बताय रहे हैं आपको –

भेंट द्वारिका, गुजरात में हैं मकरध्वज और बजरंगी मंदिर
पुत्र मकरध्वज व हनुमानजी का पहला मंदिर गुजरात के भेंटद्वारिका में स्थित है। यह स्थान मुख्य द्वारिका से दो किलो मीटर अंदर की ओर है। इस मंदिर को दांडी हनुमान मंदिर के नाम से जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यह वही स्थान है जहां पहली बार हनुमानजी अपने पुत्र मकरध्वज से मिले थे। मंदिर के अंदर प्रवेश करते ही सामने हनुमान पुत्र मकरध्वज की प्रतिमा है, वहीं पास में हनुमानजी की प्रतिमा भी स्थापित है। इन दोनों प्रतिमाओं की विशेषता यह है कि इन दोनों के हाथों कोई भी शस्त्र नहीं है और ये आनंदित मुद्रा में है।

Bentdwarika Gujarat temple of Hanuman and Makardhwaj_vijayrampatrika-com_01हनुमानजी और मकरध्वज का दूसरा मंदिर
राजस्थान के अजमेर से 50 किलोमीटर दूर जोधपुर मार्ग पर स्थित ब्यावर में हनुमानजी के पुत्र मकरध्वज का मंदिर स्थित है। यहां मकरध्वज के साथ हनुमानजी की भी पूजा की जाती है। प्रत्येक मंगलवार व शनिवार को देश के अनेक भागों से श्रद्धालु यहां दर्शन करने के लिए आते हैं। ब्यावर के विजयनगर-बलाड़ मार्ग के मध्य भूभाग पर स्थित यह प्रख्यात मंदिर त्रेतायुगीन संदर्भों से जुड़ा हुआ है। यहां शारीरिक, मानसिक रोगों के अलावा ऊपरी बाधाओं से भी मुक्ति मिलती ही है साथ में मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं।

संभवत: संपूर्ण भारत देश में ब्यावर का यह दूसरा अनूठा मंदिर है, जहां एक ही स्थान पर हनुमान और उनके पुत्र मकरध्वज अर्थात दोनों पिता-पुत्र की पूजा अर्चना की जाती है। इसी स्थल पर प्राचीनकाल में नाथ संप्रदाय के गुरु गोरखनाथ ने दीर्घकाल तक तप किया था और यहां नाथ सिद्ध पीठ-ध्वज पंथ की स्थापना की थी। वर्तमान मंदिर परिसर में स्थित महायोगी गोरखनाथ का धूणा भी बहुत सी रहस्यमयी शक्तियों से परिपूर्ण है। जनश्रुति के अनुसार इस धूणे की 7 परिक्रमा लगाने से संकट निवारण होकर कामना की पूर्ति होती है। यहां वट वृक्ष के निकट नाथ वंशजों की बहुत सी समाधियां भी हैं।

मकरध्वज बालाजी धाम परिसर में घंटाकर्ण महावीर, भैरवनाथ, श्मशानेश्वर, प्रेतराज, समाधि नाथ महाराज की प्रतिमाएं भी प्रतिष्ठित हैं। यहां शारीरिक, मानसिक रोगों के अलावा ऊपरी बाधाओं से भी मुक्ति मिलती ही है, साथ में मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं। हजारों भक्त इनके चमत्कार से लाभान्वित हुए हैं। यहां इतने साक्षात चमत्कार देखने को मिलते हैं, कि नास्तिक भी आस्तिक बन जाते हैं।

janmashtami news_krisna-05यह स्थल हनुमान, मकरध्वज गोरखनाथ, महाकाल भैरव, घंटाकर्ण संबंधी समस्त उपासना एवं तंत्र-मंत्र साधना के लिए उपासकों, भक्तों, साधकों, तांत्रिकों का सर्वसिद्धि प्रदायक जाग्रत तीर्थ है। यही कारण है कि अनेकानेक साधक अपनी साधना में लीन होकर भांति-भांति के तांत्रिक प्रयोग करते रहते हैं। तो इस तरह इन मंदिरों में होती है हनुमानजी और उनके पुत्र की पूजा। हनुमान जी की महिमा और उनसे जुडे रोचक प्रसंग जानने कक लिए क्लिक करें ये लिंक्स ….

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