हनुमान जी के दस मंदिरः ये हैं प्रमुख खासियत, हाल-ब-हाल उमडते भक्तों की होती हैं मनोकामनाएं पूरी

Hanuman ji' top 10-Temples_bajaranga bali baba's articles on vijayrampatrika_01px350xजीवन एक चक्रव्यूह है, यदि ध्येयपर्क और सामान्य तरीके अपनाते हैं तो इंसान को पथ के रोडों या भटकावों से गुजरना नहीं पडता। इसी वचन के साथ सतयुग बीता, त्रेता व द्वापर बीते, उनमें आदमी के अलावा देवता, राक्षस, गन्धर्व, यक्ष आदि भी साक्षात् होते थे। अब चौथा युग, ‘कल’ युग है। यह वह युग है जिसमें इंसान ही देव और इंसान ही राक्षस होता है। इस तरह जो लोग मांसहारी,क्रूर, पापकर्मी, दूसरों (निर्दोषों) को अकारण दुख देने वाले, झूंटा, स्वार्थी और अय्यासी होते हैं वे ही राक्षस माने गए हैं और जो इस तरह के कृत्यों के विपरीत, आनन्दोत्सवमयी व ध्येयपर्क लाइफ जीते हैं वे देवों की श्रेणी में माने गए हैं। तीसरे लोग वे हैं जो सामान्य जीवन जी रहे हैं, लेकिन अपने पिछले कर्मानुसार कुछ बाकी रहे को खोते-पाते हैं, इंसान माने गए हैं।

पौराणिक महत्व के अनुसार कलयुग में उन युगों जैसी स्थितियां नहीं होतीं, चूंकि इसमें सब इंसान ही तय करते नजर आते हैं। हरि दर्शन व साक्षात़् रूप कलयुग के बढती विकटता से ही संभव नहीं हैं। लेकिन कलयुग पूरी तरह किन्हीं जीवों पर हावी न हो इसके लिए आठ महामानव सशरीर बताए हैं। जिनमें सबसे ज्यादा भगवान शंकर के ग्यारवें रुद्र अवतार श्रीहनुमानजी को ही पूजा जाता है। हनुमानजी को कलियुग का जीवंत देवता भी माना जाता है। चाहे किसी भी प्रकार की समस्या हो भगवान हनुमान अपने भक्तों की हर समस्या का निदान तुरंत कर देते हैं।

वैसे तो दुनिया की सबसे पवित्र और प्राचीन भारतभूमि में हनुमानजी के लाखों मंदिर हैं, लेकिन उनमें से कुछ मंदिरों की अपनी खास विशेषता है जिसके चलते यहां हनुमानजी के दर्शनों के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ता है। vijayrampatrika.com आपको उन्हीं से से कुछ मंदिरों की जानकारी आपके समक्ष पेश कर रहा है, दी गर्इ पिक्स छुएं और स्लाइड्स में देखें……….

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Categories: 》जीवन दर्शन | Tags: | Leave a comment

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