मुणिया मेला लाइव : सुनहरी धूप में चल रहे तेज पग, है रही ‘राधे-राधे’

brajbhoomi_goverdhan Parikrama_01गोवर्धन: ब्रजभूमि के पावन पर्वतराज गोवर्धन की धरा पर इन दिनों मुणिया मेला लाखों भक्त एकत्रित हो रहे हैं। हर साल की तरह श्रद्घालओं का जमावड़ा मथुरा पहुंच रहा है और त्रेता में वीर हनुमान द्वारा गोवर्धन में स्थापित गिरराज पर्वत की महिमा के सामने उत्साह का प्रवाह, भक्ति का जुनून, श्रद्धा का सागर, आस्था का पहाड़ जैसी उपमाएं भी बौनी साबित हो रही हैं। यहां कम से कम डेढ करोड़ लोग गुरू-पूर्णमासी के दिनों ही पूजा करते हैं और पूरे साल में तो परिक्रमा का सिलसिला जारी रहता है। इस दौरान तेज धूप, कंकड-पत्थर की सड़क और प्यास की गिरफत भी आस्था के हिलारों को नहीं रोक पाती। दूर से दौडे आए भक्तों की बेतादाद श्रद्धा के प्रवाह ने गोवर्धन महाराज की शरण में मानो सब कुछ न्यौछावर कर दिया हो, यहां पहुंचने पर तो ऐसा ही लगता है।

» उत्तर भारत का ये मिनी महाकुंभ पूरी दुनियां में गिरिराज की परिक्रमा के लिए प्रसिद्घ है
» चार करोड़ लोग आते हैं हर साल, डेढ़ करोड़ तो मुणिया मेला में आने वाले श्रद्घालु ही
» सरकार द्वारा चलाई गईें बसें और मेला पैसेन्जर ट्रेनें भी यात्रियों के लिए पड रहीं कम

वाहनों के नगर में प्रवेश पर रोक
आज गुरूवार है और पूर्णिमा कल है, लेकिन गोवर्धन जाने की बेताबी लोगों में इतनी है कि स्पेशल ट्रेनें भी कम पड़ रहीं हैं। बस, ट्रक, टेम्पो और ट्रक्टर आदि वाहनों को जाम की विकट समस्या से दूर रहने के वास्ते गोवर्धन में अंदर घुसने नहीं दिया जा रहा है। सुनहरी दो पहरी और सूर्य के प्रचंड तेवर भक्ति की अविरल धार को तोड़ने की कोशिश तो कर रहे हैं, लेकिन कामयाब नहीं हो पा रहे। परिक्रमा में भक्तों के पडते पग vijayrampatrika.com लाइव पेश कर रहा है –

Govardhan_braj hill-vijayrampatrika-150px40 डिग्री तापमान और भीडु फिर भी लबालब
बुधवार से पहले से ही श्रद्धा की सुनामी ने पर्वतराज को अपने आगोश में ले लिया। लाखों भक्तों ने गोवर्धन पहुंचकर गिरिराज महाराज की सप्तकोसीय परिक्रमा शुरू की। गोवर्धन, मथुरा, छटीकरा, बरसाना, डीग, भरतपुर मार्गो से यात्रियों का रेला शुरू हुआ, जिसने मानव श्रखला टूटने नहीं दी। गिरिराज की भक्ति में डूबे श्रद्धालुओं ने उमस भरी गर्मी को भी मात दे दी। जुलाई का दूसरा सप्ताह शुरू हो चुका है, लेकिन अभी तक बारिश नहीं हुई। बुधवार को करीब 40 डिग्री सेल्सियस के तापमान में 25 किमी लम्बे परिक्रमा मार्ग में पसीने से लथपथ गिरिराज भक्तों का सागर हर घटे उफान लेता रहा।

इंद्र के कोप से ब्रजवासियों की रक्षा की थी गिरि राज ने
शास्त्रों के अनुसार करीब साढ़े पांच हजार बरस पहले देवराज इंद्र के कोप से ब्रज को बचाने के लिए कान्हा ने जिस पर्वत को अपनी बाये हाथ की कनिष्ठका उंगली पर उठाया था, वही गोवर्धन धाम आज राधे- राधे, श्याम मिलादे के बोलों से गुंजायमान हो रहा है। उत्तर भारत के मिनी कुंभ कहे जाने वाले विश्व प्रसिद्ध मुड़िया पूर्णिमा मेले में विभिन्न प्रात और संस्कृतियों के लोग एक ही लक्ष्य पर एक साथ बढ़ते दिख रहे हैं। देर शाम तक बढ़ती भीड़ ने तमाम सरकारी इंतजामों को आइना दिखा दिया। आज दोपहर तक बरसाना मार्ग की यातायात व्यवस्था मेले के दौरान भी डग्गेमारों के हवाले रही। जीप की छतों पर जान जोखिम में डालकर श्रद्धालुओं ने गोवर्धन का सफर तय किया।

कुसुम सरोवर को भुला दिया अथॅारिटीज ने
मथुरा में बेशकीमती कारीगरी पर इठलाते कुसुम सरोवर के सौंदर्य से परिक्रमार्थी बेगाने नजर आ रहे हैं। इतना ही नहीं कुसुम सरोवर की खूबसूरत छतरियों पर लाखों रुपये की लागत से लगी रंग बिरंगी लाइटें अंधेरा फैला रही हैं। राधाकुंड परिक्रमा मार्ग पर बनी ऐतिहासिक इमारत पुरातत्व विभाग की अनदेखी के चलते अंधेरे में गुम नजर आ रही हैं। पुरातत्व विभाग की धरोहर का बुरा हश्र प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर प्रश्न चिन्ह लगाता है। सात कोस को रोशन करने के लिए विप्रा पसीने बहा रहा है, वहीं ब्रजभूमि को संवारने का जिम्मा लिए फिर रहीं ये अथॉरिटीज पुरातन इमारत में रोशनी के संसाधन तक उपलब्ध नहीं करा पाईं। जबकि यहां क्षेत्रीय प्रशासन की बैठकें कईं महिने से प्लान बना रहीं थीं।

Govardhan_Sri Radhe written on a rock at Govardhanपरिक्रमा को शीतलदायक बनाती मानसीगंगा
गोवर्धन में जारी परिक्रमा पूर्ण करने के बाद शायद ही कोई ऐसा श्रद्धालु होगा, जो मानसीगंगा में स्नान नहीं करना चाहता हो। इस समय यहां भी सफाई और सुरक्षा के कडे़ कदम उठाए गए हैं। खुशहाली में चार चांद लगाने की दृष्टि से मानसीगंगा को चारों तरफ से बेरीकेडिंग और जाली लगाकर बंद कर दिया है। इससे फव्वारों मे नहाने वालों की लंबी लाइनें बेपरेशानी लग सकती हैं। लाखों की संख्या पर पाच सैकड़ा फव्वारों ने श्रद्धालुओं को बिना नहाये ही लौटने पर मजबूर कर दिया। लेकिन भक्तों की आस्था और बढ रही है।

भरतपुर वासियों की प्याउू सबसे ज्यादा
प्रसादी, दान्य पुण्य और पानी पिलाने जैसी सेवा यहां के स्थानीय निवासियों ने कर रखी हैं। यहां दूर -दूर से आए अमीर सेठ-साहूकार पानी-प्रसाद का डेरा लगाए बैठे हैं। प्याउू लगाने वाले लोगों में ग्वपलियर, बरसाना, छाता, भरतपुर, डीग, मथुरा समेत कई दर्जन जिले- कस्बों के लेाग पुण्यकर्म कर रहे हैं। आने वाले भक्तों को मुफत में ठण्डा पानी या शर्बत पिलाने में भरतपुरवासियों के प्याउू ज्यादा नजर आ रहे हैं। सात कोस परिक्रमा मार्ग में लगाए स्पीकर सिस्टम से निकलती भजनों की धुन, पौराणिक स्थलियों की जानकारी एवं बिछड़ों को बुलाते परिजनों की आवाज ने तलहटी की व्यवस्थाओं में चार चाद लगा दिए हैं।

बिजली आपूर्ति पर सिकुडी व्यवस्था
परिक्रमार्थियों के अनुसार रात्रि में भी विद्युत विभाग सेवा देना में अक्षम रहा, हालांकि आज शाम तक यह दिक्कत दूर करने के प्रयास भी जारी हैं। लेकिन कायरें के नाम पर भीषण गर्मी में महीनों से बिजली कटौती कर रहा विभाग मुड़िया मेला में अबाध विद्युत आपूर्ति नहीं दे पा रहा है। बिजली लुकाछिपी खेलती रही और परिक्रमार्थी ठोकर खाते रहे।

जतीपुरा मार्ग ही नहीं भरा, सब ठहर गए
आज शाम तक भक्तों का रेला इतना हो जाएगा कि हौले -हौले पग धरने लायक भी जगह बचना मुश्किल हो जाएगा। इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले मुणिया मेले में यही हआ था। कच्चे परिक्रमा मार्ग में बिखरी गिट्टिया परिक्रमार्थियों को बेहाल कर रही हैं। कच्चे मार्ग को ऑडियो सिस्टम एवं लाइटों के लिए खोदा गया था, लेकिन कार्य पूर्ण होने के बाद उस पर मिट्टी नहीं डलवाई, जिससे मार्ग का बुरा हाल है। छाता- गोव्रधन मार्ग पर भी भीड़ खूब है।

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