ऐसा किला जहां सूरज ढलते ही महसूस होता है रूहों का आतंक, पास नहीं ठहरते लोग!

Bhangadh fortरहस्यमयी दुनिया में भारत। यह न केवल निवासी जानते हैं बल्कि प्रवासी भी; हिंदुस्तान की अलौकिक शक्तियों एवं तंत्र क्रिया से वाकिफ हैं। जब बात तंत्रविद्या की आती है तो भूतों के किस्से याद आने लगते हैं। इसमें उनकी रहवास ठौर, महफिल और अमुक्ति का जिक्र किया जाता है। भारत में ऐसी कर्इ जगह हैं, जहां प्रेतयोनी के तीनों मामले देखे गए हैं। इन जगहों पर भूत दिखार्इ नहीं दिए लेकिन सन्नाटा छाना, दम पर बनना तथा रात में विभिन्न गतिविधियां का यहां होना सरकार के कान भी बजा चुका है। सबसे नेग्लेक्टेड एंड डेसोलैट एक फोर्ट है – भानगढ़ का किला।

जी हां, भूतों का भानगढ़ भी कहते हैं कुछ लोग इसे। देखने पर चाहे आपको जैसा लगे, लेकिन पहली बार गए लोग तो यही सवाल करते हैं -क्या इस दुनिया में बुरी आत्माओं और भूतों का अस्तित्त्व है? क्या हम किसी भी माध्यम से भूतों से मिल सकते हैं? क्या हम उन्हें देख सकते हैं, उन्हें महसूस कर सकते हैं?
जिज्ञासा के बाद सुनते हैं जब सैंकडों बरस पुराने भानगढ़ की कहानी, तो शांति के साथ भय भी महसूस होता है। यहां पेश है उन किलों में पहुंचे कुछ टूरिस्टों का अनुभव भी, देखकर समझ सकते हैं अपनी भी होने वाली दास्तां…..

राजस्थान में अरावली पर्वत श्रंखला लंबी फैली हुर्इ है। यहां अलवर जिले में ही एक खोर पर स्थित है भानगढ़। कहते हैं पहले यही राजा का हंसता-खेलता गढ़ हुआ करता था, जिसमें बाजार की जगह अब खण्डहर ही शेष हैं। देखने में जितना अच्छा है, उससे कहीं बुरा अतीत भी रहा है इसका। कमजोर दिल वालों के लिए नहीं, रोमांच के शौकीन लोगों के लिए शानदार है जगह। अगर आप भी भय को जीतने का साहस रखते हैं तो जी चाहे उतनी बार जा सकते हैं।

Bhangadh fortमुगलों के दौर में गढा़ था गढ़
इतिहास की जानकारियाें में भानगढ के बसने और उजडने की बडी रोचक कहानी है। 16 वीं सदी, जब भारत में मुगल शासकों का जमाना था, तब अकबरी सेना नायक रहे माधो सिंह ने यह नगर बसाया था। माधो सिंह राजा मानसिंह की संतान हैं और मानसिंह अकबर के ससुर। भानगढ़ की राजकुमारी बहुत सुंदर थी, जिसे रत्नावती कहा जाता है। उसके रूप व सौंदर्य के चर्चे नगर वासियों तक में थे। किले से कुछ ही दूर एक तांत्रिक सिंधिंया को भी इसकी जानकारी मिली। बाजार के पास ही एक पेड तले ही वह राजकुमारी पर आसक्त होना चाहता था। उसने राजा से उसका हाथ भी मांगा लेकिन रत्नावती ने साफ इंकार कर दिया। एक रोज बाजार में उसने राजकुमारी के लिए इत्र ले जाती दासी को देखा तो तंत्र क्रिया से इत्र को बांध दिया।

राजकुमारी ने जब इत्र मांगा तो विश्वस्नीय दासी ने कहा कि इस पर सिंधिया ने काला जादू कर दिया है। तब राजकुमारी ने बोतल को चट्टान पर उलेट दिया। अभिमंत्रित चट्टान उसी तांत्रिक के पास लुढकती चली गर्इ, लेकिन इससे पहले वह मरता उसने शाप दे दिया कि जिस कारण भानगढ़ खूबसूरत दुनिया बसा रहा है वह सब भस्म हो जाएगा, यहां रहने वाला कोर्इ जिंदा नहीं बचेगा। संयोग से उन्हीं दिनों भानगढ़-अजबढ़ में युद्घ हो गया और सब मारे गए। दूसरे राजा ने विजित इस खूबसूरत किले पर कब्जा तो जमा लिया लेकिन अमौत मारे गए लोगों की रूहों का आतंक सहन न कर सका। कहा जाता है कि रत्नावती, तांत्रिक सिंधिया और भानगढ़ के अन्य लोगों का उूपरी चक्कर तभी से यहां मौजूद है। इसलिए गांव-शहर भी यहां से दूर बसे हैं।

दूसरा किस्सा
vijayram | patrika.comभानगढ़ की बर्बादी के सम्बन्ध में कर्इ और कहानियां भी हैं। दूसरी के अनुसार, यहं एक तपस्वी बालानाथ एवं राजा अजबसिंह के बीच कोर्इ समझौता हुआ था। लेकिन अपना काम पूरा करने के पश्चात् राजा ने नहीं माना तो बाबा ने शाप दे दिया। उन्होंने कहा कि मंदिरों को छोड़ सब खत्म हो जाएगा। यहां कोर्इ बस नहीं सकेगा, मरने वाले भी मुक्ति नहीं पा सकेंगे। कहते हैं किले का निर्माण कार्य आगे नहीं हुआ, यह प्रेतवाधित भी हो गया। तबसे पूरा क्षेत्र सुनसान और गढ़ वीरान पडा है।

हो गया ऐसा भानगढ़
भानगढ़ किला शानदार रहा उतना ही विशाल भी, लेकिन इसका वर्तमान खंडहर में तब्दील हो गया है। किले में अब भी प्राकृतिक झरने, उद्यान, हवेलियां, छतरी और बनियान ट्री गरिमा को बढा़ते हैं। साथ ही भगवान सोमेश्वर, गोपीनाथ, मंगला देवी और केशव राय के मंदिर भी उस दौर की धर्मनिष्ठा को उजागर करते नजर आते हैं। अगर थोडी़ दूर पर बसे गांवों के लोगों की माने तो यहां आने के बाद पर्यटक अजीब सी बेचैनी महसूस करता है। इसके अलावा भले ही आज किले को भूतिया या भानगढ़ को वीरान कहा जाता हो है, मगर वास्तुकला को गौर से देखें तो अहसास होता है कि इसकी खूबसूरती वाकर्इ बेमिसाल है। किसी का भी मन मोह सकती है।

दरो-दीवारों की बानगी
खंडहर के रूप में पर्यटकों के बीच मौजूद भानगढ़ फोर्ट की दरो-दीवारें कर्इ राज आज भी समेटे हैं। कहा जाता है कि जिस समय इस किले का निर्माण हुआ, सभी इसकी सुंदरता पर मोहित हो उठे थे। इस किले को बनाते वक़्त इस बात का पूरा ध्यान रखा गया था कि दुश्मनों से क्षेत्र की सम्पूर्ण सुरक्षा हो सके। पहाडियों में कर्इ गुफारूपी रास्ते साफ नजर आते हैं।

शाम ढलने के बाद से…
कहते हैं दिनभर पर्यटक आ सकते हैं, लेकिन सूरज ढलने के वक्त सब लौट जाते हैं। मीडिया रिपोर्टों में कुछ पर्यटकों को बहुत अजीब लगा था, यहां खंण्डहरों से औरतों की आवाज या तरंगें सुनार्इ देती हैं। भीतर के हिस्से तलवारों की खनखनाहट, चींखों और चूडियाें से जोडकर महसूस किए जाते हैं। कमरों में बिना उजाले एवं किले के पिछले हिस्‍से वाले द्वार बहुत मिस्ट्री समेटे हैं। ऐसा लगता है कि कोर्इ बतिया रहा है। गुनहानट के साथ मुर्दों की गंध भी साफ देखी जा सकती है।

कमान खुद सरकार ने संभाली
यहां रात को रूकने वाले किसी आपदा के शिकार न हों, इसलिए भारत सरकार का एक बोर्ड भानगढ़ की निगरानी करता है। यहां आर्कियो Bhangadh fortलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की टीम ASI ने सख्त हिदायत दे रखी है, ‘शाम होने तक सभी पर्यटक किले से दूर चले जाएं।’ तंत्रक्रिया में विश्वास करने वाले लोगों के अनुसार, जो कोर्इ भी यहां गलती से ठहरा, लौटकर वापिस नहीं आया। जंगली जानवर, चमगादड़ और कर्इ खतरनाक कीटों का भी यहां डेरा है। इसलिए लोग हिम्मत नहीं जुटाते।
यदि आप यहां पुरातत्व निहारना चाहते हैं तो खूब आएं, एक दो लोग और भी साथ लाएं। फोटो खींचें, लेकिन शाम होते-होते वापिस हो लें। वो कहते हैं न कि बुरा वक्त किसी को बता कर नहीं आता! अगली पोस्ट में फिर मिलते हैं।

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