शास्त्री जी जैसे नेता अब कहां? आज गप्पू हैं, अमरीका-चीन के चंपू…

 Here is a brief biography and history of Shri Lal Bahadur Shastri. You're Read information on life of Lal Bahadur Sastri. - Www.vijayrampatrika.com》EDITORIAL @ Vijayrampatrika.Com : हिंदुस्तानी आवाम ने अब तक 17 प्रधानमंत्री देखे। हर पीएम ने अपने कार्यकाल में अपनी आकांक्षाओं आैर सिद्घातों से सत्ता संभाली। इनमें से कुछ नेताओं को जनता ने सिर आंखों-पर रखा तो कुछ की तस्वीरें दिखते ही लोग मजाक उड़ाने लग गए। कुछ की प्रेम – कहानियां चर्चे में रहीं, तो किसी को इमरजेंसी के लिए ‘धिक्कारा’ तक गया। आजकल सोशल साइट्स पर, जब उनकी जयंतियां आती हैं तो तरह-तरह के चर्चे होते हैं।

किन्हीं की (नेता जो पीएम रहे) पुरानी तस्वीरें लाल सुर्खिंयां बटाेरती हैं, तो कुछ को नमन कर लोग उनकी आदर्श सोच पर चलने का वादा करने लगते हैं। शास्त्रीजी ऐसे ही नेता थे, जिनके आदर्शों की न केवल बात होती है, बल्कि सोशल प्लेटफार्मों पर स्टीकरों के जरिए ऐसे ही प्रधानमंत्री की मांग की जाने लगती है।

लाल बहादुर शास्त्री (जयंती विशेष)
2 अक्टूबर को भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जन्मतिथि है, ऐसे में आप Vijayrampatrika.com पर मोहम्मद स्माइल खान के इस आलेख में पढें शास्त्री जी की सादगी, दुश्मन को संदेश देने की नीति और जनादर्शों की बानगी…..Lal Bahadur Shastri was the Secon Prime Minister of the Republic of India and a leader of the Insian National Congress party. Shastri was born in Ramnagar, ...Www.vijayrampatrika.com

दो घंटे और हो जाता पाक से युद्घ
सितंबर 1965 में हिंदुस्तान से अलग हुए पियादे ‘पाकिस्तान’ ने पश्चिमी सीमा पर बिना युद्घ की घोषणा किया हमला बोल दिया। तब हमारे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री थे। इसी से करीब ढार्इ बरस पहले चीन के हाथों भारत की करारी हार हुर्इ, तब प्रधानमंत्री नेहरू थे। पाकिस्तान ने सोचा, कि चीन ने हिंदुस्तान की 15,000 वर्ग मील भूमि छीन ली और वे हार से मुंह ढक कर बैठ गए। (आज मीडिया में ‘भारत की हार के जिम्मेदार नेहरू हैं’ शीर्षक से खबरें छपती हैं)

इस तरह चीन के हमले के बाद पाकिस्तान ने हिंदुस्तान पर दूसरा आक्रमण किया, लेकिन हमारे जवानों ने महजब से ऊपर उठकर हर मोर्चे पर उसे हराया। हमारे जवान अधिक शहीद हुए, नुकसान भले ही पाक की तुलना में ज्यादा हुआ लेकिन अपनी जमीन से दुश्मन को पौगारन भगा दिया। यह युद्घ दो घंटे और चलता, तो लाहौर भी भारत में होता। पर पाकिस्तान तो नापाकिस्तान है, उसे लगा कि ‘मरकर भी मार दो’ वाले तेवर संग हिंदुस्तानी फौज आगे बढ़ती रही ताे दुनिया के नक्शे में ”घोषित मुसलमान राष्ट्र” का तो नामोनिशान ही मिट जाएगा ! तब पाकिस्तान ने अमरीका के पांव छुए, हालांकि उसकी ओर से इस्तेमाल किए गए हथियार भी अमेरिकन ही थे।

अमेरिका करता भारत की खिंचार्इ
पाक ने अमेरिका से कहा कि भारत हमसे भारी है, वे किसी तरह युद्घ रूकवा दें। अमेरिका जानता था कि वहां अब पीएम नेहरू नहीं, शास्त्री हैं। उसी भारत के शास्त्री, जिन्हें दो-तीन बार पहले ही धमका चुके थे। वो ऐसे कि अमरीका से अनाज आता था भारत में महंगे दामों पर, वो भी ऐसा कि जिसे खाने से पहले ही फेंक देना बेहतर होता था। गेंहू लाल रंग के सडे़-गले होते थे और भारत-अमेरिका के बीच यह समझौता हुआ था नेहरू के शासनकाल में। पीएल 48 स्कीम के तहत अमेरिका शर्तों पर भारत को गेंहू बेचता था। PL यानी पब्लिक लॉ, जैसी धाराएं भारत में पब्लिक के लिए होती थीं, उनके उलट। तो अमेरिका की पीएल 48 स्कीम की शर्तें थीं कि भारत उनका चंपू रहेगा, यानी जो अमेरिका चाहेगा भारत के अंतर्राष्ट्रीय हित भी वैसे ही होंगे।

शास्त्री जी ने अमेरिका को दिया जवाब
जिस गेंहू को अमरीका में जानवर नहीं खाते थे, वे उसे भारत में सप्लार्इ करते थे। आप अपने बुजुर्गों से पूछ सकते हैं कि आजादी के समय से कैसा विदेशी अनाज खरीदा करते थे। पाक के आग्रह पर अमेरिका ने भारत को धमकी दी – ‘या तो हमारी मानो, नहीं तो गेंहू देना बंद कर देंगे। लोग तडप-तडप कर मर जाएंगे।’ इस पर शास्त्री जी ने क्या जवाब दिया मालूम है तुम्हें? उन्होंने राष्ट्र के नाम संदेश दिया। दिल्ली के रामलीला में लाखों लोगों से निवेदन किया कि एक तरफ तो पाकिस्तान से जंग चल रही है, दूसरे अमरीका की धौंस! इसलिए सभी अपने फाल्तू खर्चे रोकें, देश के लिए डोमेस्टिक सेविंग में हिस्सेदारी दें, खूब मेहनत करें, हल-बैल की खेती से शाक-सब्जी उगाएं, हफ्ते में एक दिन व्रत रख भूखे रहें।”

इस पर लोगों ने शास्त्री जी का आवाह्न गले उतारा और कहा कि हमें भूखा मरना मंजूर है लेकिन शैतान अमेरिका-पाक के सामने झुकना मंजूर नहीं। हम ऐसा परिश्रम करेंगे कि पीढियां सकुशल हिंदुस्तान में जी सकें।’ इसके बाद क्या हुआ, आप आगे पढिए……..

लोगों ने आपातकाल जैसी परिस्थति में जी तोड़ परिश्रम किया, सोमवार को व्रत रखने लगे। खुद शास्त्री जी ने भी व्रत रखा, हमेशा सादा कपडे पहने, सादे ही रहे। उनकी पत्नी ललिता देवी बीमार रहती थीं, फिर भी नौकरानी की सेवा नहीं ली। बच्चों को पढ़ाने के लिए टीचर जो थे, वे भी हटा दिए। शास्त्री जी के पास सिर्फ धोती-कुर्ते थे, फट जाने पर वे ही सुर्इ से सिल लिया करते थे। पगार भी सेना के नाम कर दी। ऐसे थे शास्त्री जी।

रुक गयी पाक से जंग
अमेरिका तब महाशक्ति था, दुनिया की सारी न्यायिक संस्थाएं उसकी मुट्ठी में थीं, आज भी हैं! सो, यूएन के हस्तक्षेप के चलते पाकिस्तान को बिना नष्ट किए युद्घ विराम हो गया। जो कश्मीर की भूमि हमने पाकिस्तान द्वारा 1948 में छीनी गर्इ वापिस पा ली थी, वो यूएन में अमरीका व चीन के दवाब के चलते फिर पाकिस्तान को देनी पडी़। फिर भी शास्त्री जी अड़ गए कि पाकिस्तान के कब्जे में गर्इ भूमि हमारी है, हमला भी पहले पाकिस्तान का हुआ। अंतत: सोवियत संघ में दोनों देशों (हिंदुस्तान-पाकिस्तान) के बीच समझौता होना तय हो गया।

और फिर हमेशा के लिए मातृभूमि छोड गया यह सपूत
सोवियत संघ के ताशकंद में पाकिस्तान और भारतीय प्रधानमंत्री के बीच सुलह होनी थी। शास्त्री जी वहां मौके पर पहुंचे, वार्ता भी हुर्इ। जिसे ‘ताशकंद का समझौता’ कहा गया। लेकिन हिंदुस्तानियों को क्या मालूम था कि वे (शास्त्री जी) कभी वापिस नहीं लौटेंगे। दूसरे दिन पूरे देश को बताया गया कि उनकी तो मौत हो गर्इ। कैसे हुर्इ, जवाब किसी ने नहीं दिया । चूंकि वे मौत नहीं हत्या के शिकार हुए थे……….. ! पाकिस्तान, अमेरिका और कुछ गद्दारों की प्लानिंग से…..

जानना चाहते हैं आप, तब की घटना व भारतीय पीएम की हत्या से जुडे कुछ राज, तो ये वीडियो क्लिक करें:

याद करती है आवाम: शास्त्री जी जैसी सादगी अब कहां
सोवियत संघ में उनकी हत्या के बाद वहीं समाधि बना दी गर्इ। भारत में जनधारा अश्रुधारा में बदल गर्इ। खूब रोए, गरीब – किसान। आज भी रोते हैं, जब कोर्इ भारतीय शास्त्री जी की जीवनी पढ़ता है, देश को दिए उनके योगदान के बारे में पढ़ता है, उनकी सादगी के बारे में पढ़ता है… लाल बहादुर शास्त्री, एक ऐसे भारतीय नेता, जिन्होंने प्रधानमंत्री रहते हुए भी आम लोगों सा अपने साथ बर्ताव किया। उनका पूरा जीवन ईमानदारी और मातृभूमि की सेवा के आदर्शों पर आधारित रहा।

गूंज पड़ा ”जय जवान और जय किसान”
ऐसे प्रधानमंत्री जिन्होंने ”जय जवान और जय किसान” का नारा दिया। वह नारा ऐसा गूंजा, कि आगे चलकर भारत दुनिया में सबसे बड़ा अनाज उत्पादक देश बनकर उभरा, सर्वाधिक कृषि योग्य भूमि हिंदुस्तान में तैयार हुई। कहां गया अमरीका और कहां गया चीन, लोग उनके कार्यकाल के बाद तक जुबां पर लिए रहे। जब घायल सैनिकों को अस्पताल में शास्त्री जी देखने पहुंचे थे तो, उन अधमरे सैनिकों के सैल्यूट करने की हिम्मत देख आंखों से अश्रुधारा फूट पडी़। किसान उनके लिए खाना लेकर पहुंचा तो, उसके दुर्बल शरीर और फटे वस्त्रों काे देख ग्लानि से भर गए। उनका मानना था कि देश को चलाने के किसान और देश को बचाने के लिए जवान, बहुत जरूरी हैं। सबसे ज्यादा जरूरी।

स्वदेशी होना सिखा गए
नेहरू पहले प्रधानमंत्री थे, निसंदेह हमारे बच्चे उन्हें ”चाचा” कहकर याद करते रहेंगे। लेकिन ”स्वदेश” शब्द का अर्थ आया, समझाया शास्त्री जी ने। अंग्रेजों (अमरीका, ब्रिटेन) की कठपुतली बनना किसी और ने सीखा होगा, स्वदेशी बनाना शास्त्री जी हमें सिखा गए। वे जबतक पीएम रहे, विदेशी कंपनियां देश से दूर रहीं। उनका मानना था कि जिन प्यादों ने हम पर 250 साल राज किया, जिनकी गुलामी से आजाद होने के लिए लाखों हिंदुस्तानी बलिदान कर गए, उन विदेशी कंपनियों को देश में आजादी देकर कोर्इ समझौता नहीं किया जाएगा !

उनके पास कोर्चा भी न था
ऐसा प्रधानमंत्री हिंदुस्तान में अब शायद ही कभी हो, अंत में जब शास्त्रीजी की पासबुक कांग्रेस सत्ता ने चेक की तो क्या निकला? सिर्फ 365 रुपए और 35 पैसे ही शास्त्री जी के बैंक अकाउंट में थे। आज महीने दर महीने घपले-घोटाले की खबरें आ जाती हैं। ये ‘नालायक’ नेता देश को बेचकर खा रहे हैं। आज विदेशी कंपनियों को सिर्फ देश में घुसाया नहीं जा रहा, बल्कि जमीन बेचकर उन्हें हमेशा के लिए बसाया जा रहा है। वॉलमार्ट, एफडीआर्इ और न जाने कितने विदेशी पैर इस पवित्र भूमि पर पड़ चुके हैं। धिक्कार है ऐसे नेताओं को जो विदेशी होकर भी देशसेवा के नाम पर जनता से खिलवाड़ कर रहे हैं —— !

जय हिंद !!

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